असम में नया कानून लागू: शादी, तलाक और लिव-इन के नियम बदल गए
शादी, तलाक और लिव-इन पर चलेगा एक कानून… और नियम तोड़ा तो सीधा जेल
दोस्तों… असम से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरे देश में बहस छेड़ दी है। अब असम में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी UCC बिल पास हो चुका है। उत्तराखंड और गुजरात के बाद असम ऐसा करने वाला तीसरा राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री हिमन्त बिश्व शर्मा की सरकार ने विधानसभा के आखिरी दिन इस बिल को पास करा दिया, जबकि विपक्ष लगातार इसका विरोध करता रहा। लेकिन भारी हंगामे के बीच आखिरकार कानून को मंजूरी मिल गई… और अब शादी, तलाक, लिव-इन और संपत्ति से जुड़े नियम पूरी तरह बदलने वाले हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल… आखिर UCC है क्या? आसान भाषा में समझें तो अभी भारत में अलग-अलग धर्मों के लिए शादी, तलाक और संपत्ति के अलग-अलग कानून हैं। लेकिन UCC का मतलब है — सबके लिए एक समान कानून। यानी धर्म कोई भी हो… नियम एक जैसे होंगे। सरकार का दावा है कि इससे समाज में समानता आएगी और कानूनी व्यवस्था ज्यादा मजबूत होगी। हालांकि असम में आदिवासी समुदायों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है ताकि उनकी परंपराएं सुरक्षित रह सकें।
अब बात करते हैं उन नियमों की जिनकी सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। सबसे पहले — बहुविवाह यानी एक से ज्यादा शादी पर पूरी तरह रोक। अगर कोई ऐसा करता हुआ पकड़ा गया… तो उसे 7 साल तक की जेल हो सकती है। इतना ही नहीं… अगर कोई अपनी पहचान छिपाकर, धोखा देकर या जबरदस्ती शादी करता है, तब भी सख्त कार्रवाई होगी। बाल विवाह या बिना मर्जी की शादी पर भी जेल का प्रावधान रखा गया है। अब शादी और तलाक का सरकारी रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा… और समय पर रजिस्ट्रेशन नहीं कराया तो जुर्माना देना पड़ेगा।
लेकिन दोस्तों… इस कानून का सबसे ज्यादा चर्चा वाला हिस्सा है — लिव-इन रिलेशनशिप। अब असम में अगर कोई कपल लिव-इन में रहता है, तो उसे एक महीने के भीतर सरकारी रजिस्ट्रेशन कराना होगा। अगर ऐसा नहीं किया गया… तो जेल या जुर्माना दोनों हो सकते हैं। और अगर किसी ने गलत जानकारी दी या कुछ छुपाया… तब भी सख्त कार्रवाई होगी। सरकार का कहना है कि इससे लिव-इन में रहने वाले लोगों के अधिकार सुरक्षित होंगे… लेकिन विपक्ष इसे लोगों की निजी जिंदगी में दखल बता रहा है।
सिर्फ इतना ही नहीं… संपत्ति के नियम भी बदले गए हैं। अब बेटियों और माता-पिता को भी बेटों के बराबर कानूनी अधिकार मिलेगा। सरकार इसे सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम बता रही है… जबकि विपक्ष का कहना है कि ये राजनीतिक एजेंडा है। अब सवाल यही है कि क्या आने वाले समय में दूसरे राज्य भी UCC लागू करेंगे? और सबसे बड़ा सवाल — क्या पूरे देश में एक समान कानून होना चाहिए? आपकी इस मुद्दे पर क्या राय है… कमेंट करके जरूर बताइए।
