बीमा कंपनियों की मनमानी खत्म! IRDAI का बड़ा आदेश, अब 15 दिन में मिलेगा क्लेम
अगर आपकी बीमा कंपनी क्लेम देने में महीनों लगाती है या बार-बार ऑफिस के चक्कर कटवाते है तो अब खेल बदलने वाला है! क्योंकि IRDAI ने बीमा कंपनियों पर ऐसा सख्त शिकंजा कसा है जिससे अब 15, 30 और 60 दिनों में क्लेम का हिसाब देना होगा!
बीमा पॉलिसी लेते समय हर इंसान यही सोचता है कि जरूरत पड़ने पर कंपनी उसका साथ देगी। लेकिन अक्सर होता इसका उल्टा है। कई लोगों को क्लेम के लिए महीनों तक इंतजार करना पड़ता है… कई बार कंपनियां फाइल इधर से उधर घुमाती रहती हैं और कुछ मामलों में तो ग्राहक थक हारकर क्लेम छोड़ ही देता है।
लेकिन अब ऐसा करना बीमा कंपनियों के लिए आसान नहीं होगा। क्योंकि बीमा नियामक संस्था IRDAI यानी Insurance Regulatory and Development Authority of India ने कंपनियों पर सख्त नियम लागू कर दिए हैं। इन नए नियमों का मकसद है — ग्राहकों को तेज, पारदर्शी और भरोसेमंद सेवा देना।
अब आपको बताते हैं आखिर नए नियमों में क्या-क्या बदला है।
सबसे बड़ा बदलाव क्लेम सेटलमेंट को लेकर किया गया है। अब बीमा कंपनियों को तय समय सीमा के भीतर क्लेम की पूरी जानकारी देनी होगी। IRDAI के नए निर्देशों के मुताबिक कंपनियों को 15, 30 और 60 दिनों के अंदर यह बताना होगा कि कितने क्लेम मंजूर हुए… कितने खारिज किए गए… और कितने मामलों में अभी भुगतान बाकी है।
यानी अब कंपनियां ग्राहकों को लंबे समय तक अंधेरे में नहीं रख पाएंगी। हर जानकारी रिकॉर्ड में होगी और ग्राहकों तक पहुंचानी पड़ेगी। इतना ही नहीं… अगर कोई ग्राहक अपनी पॉलिसी में पता बदलवाना चाहता है, मोबाइल नंबर अपडेट करवाना चाहता है या फिर नॉमिनी बदलना चाहता है तो कंपनी को यह काम सिर्फ 7 दिनों के भीतर पूरा करना होगा। अगर तय समय में बदलाव नहीं किया गया तो इसे सीधे शिकायत माना जाएगा।
अब बात करते हैं सबसे बड़े फैसले की…
IRDAI ने पहली बार बीमा कंपनियों के CEO और MD की जिम्मेदारी सीधे ग्राहकों की सेवा से जोड़ दी है। यानि अब अगर कंपनी क्लेम में देरी करती है जरूरी जानकारी वेबसाइट पर अपलोड नहीं करती या ग्राहकों को परेशान करती है तो उसका असर सीधे कंपनी के बड़े अधिकारियों के बोनस और अतिरिक्त वेतन पर पड़ेगा।
सोचिए… अब तक जिन अधिकारियों को सिर्फ मुनाफे की चिंता होती थी उन्हें अब ग्राहक संतुष्टि का भी हिसाब देना पड़ेगा। IRDAI ने कंपनियों की निगरानी के लिए 6 बड़े मापदंड भी तय किए हैं।
इनमें शामिल हैं — कंपनी की आर्थिक स्थिति, पॉलिसी की पूरी और सही जानकारी, क्लेम सेटलमेंट रिकॉर्ड, शिकायतों का निपटान, लेखा नियमों का पालन और ग्राहकों को गुमराह करने वाले तरीकों पर नजर। यानि अब कंपनियां सिर्फ विज्ञापन दिखाकर ग्राहकों को भ्रमित नहीं कर पाएंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन नियमों के लागू होने के बाद बीमा सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। क्लेम प्रक्रिया पहले से ज्यादा तेज और आसान होगी, ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा और कंपनियों पर पारदर्शिता बनाए रखने का दबाव रहेगा।
अब सवाल यह है कि क्या इससे आम लोगों को सच में फायदा होगा? तो जवाब है — काफी हद तक हां।
क्योंकि अब हर चीज रिकॉर्ड में होगी… समय सीमा तय होगी और देरी होने पर जवाबदेही भी तय होगी। यानी अब कंपनियां ग्राहकों को महीनों तक परेशान करके आसानी से बच नहीं पाएंगी।
तो दोस्तों… क्या आपको लगता है कि IRDAI के ये नए नियम बीमा कंपनियों की मनमानी रोक पाएंगे? अपनी राय हमें कमेंट में जरूर बताइए।
