UP में फिर होंगे पंचायत चुनाव…..565 ग्राम प्रधानों की कुर्सी जाएगी… अब पूरे UP में होंगे पंचायत चुनाव… जी हाँ, उत्तर प्रदेश के 565 ग्राम प्रधानों की कुर्सी अब जाने वाली है तो क्या पूरे प्रदेश में फिर से पंचायत चुनाव होने वाले हैं? और आखिर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऐसा कौन-सा फैसला सुना दिया जिससे पंचायतों की राजनीति में भूचाल आ गया? अगर आपके गांव में भी प्रधान हैं या आप खुद अगला पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं, तो अगले 5 मिनट की यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
दोस्तों, उत्तर प्रदेश की पंचायत राजनीति में इस समय सबसे बड़ा राजनीतिक भूचाल देखने को मिल रहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक अहम आदेश के बाद प्रदेश की 565 ग्राम पंचायतों के वर्तमान प्रधानों की कुर्सी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। दरअसल, इन ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो चुका था। इसके बाद राज्य सरकार ने पंचायतों का कामकाज जारी रखने के लिए इन्हें प्रशासक के रूप में काम करने की अनुमति दे दी थी। लेकिन अब हाईकोर्ट ने इस व्यवस्था को असंवैधानिक बताते हुए सरकार से साफ पूछा है कि आखिर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कब कराए जाएंगे। अदालत ने सरकार से चुनाव की पूरी योजना पेश करने को कहा है और मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को तय कर दी है। यही वजह है कि अब पूरे प्रदेश की निगाहें सिर्फ 13 जुलाई पर टिकी हुई हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 565 ग्राम प्रधानों को प्रशासक के पद से हटाया जाएगा? क्या उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव समय से पहले होने वाले हैं? और क्या लाखों ग्रामीण मतदाताओं को फिर से वोट डालने के लिए तैयार रहना होगा? इन सवालों का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है, लेकिन इतना तय है कि हाईकोर्ट के इस एक फैसले ने पंचायतों की राजनीति को पूरी तरह गर्मा दिया है। जो लोग पिछले कई महीनों से प्रधान पद का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे, उनमें नई उम्मीद जग गई है। संभावित उम्मीदवार अब गांव-गांव जाकर लोगों से संपर्क बढ़ाने लगे हैं, जबकि मौजूदा प्रधानों की बेचैनी भी लगातार बढ़ती जा रही है।
आपको बता दें कि प्रदेश की 576 ग्राम पंचायतों में से 11 पंचायतों में पहले ही ग्राम प्रधानों के निधन के कारण एडीओ को प्रशासक बनाया गया था। जबकि बाकी 565 पंचायतों में पूर्व प्रधान ही प्रशासक के रूप में काम कर रहे हैं। सरकार ने उन्हें पुराने कार्य पूरे करने की अनुमति दी थी, लेकिन कोई भी नया विकास कार्य शुरू करने के लिए जिलाधिकारी की मंजूरी अनिवार्य कर दी गई थी। दिलचस्प बात यह है कि अब तक किसी भी प्रशासक ने नया काम शुरू करने की अनुमति नहीं मांगी। यानी पूरा सिस्टम पहले से ही इंतजार की स्थिति में था और अब हाईकोर्ट के आदेश ने इस पूरे मामले को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है।
उधर पंचायती राज विभाग का कहना है कि अभी तक हाईकोर्ट का आधिकारिक आदेश मुख्यालय तक नहीं पहुंचा है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार जैसे ही आदेश प्राप्त होगा, उसके अनुसार अगला कदम उठाया जाएगा। वहीं, इस मामले में याचिका दायर करने वाले राष्ट्रीय अधिकार संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रितिक चाहल का कहना है कि हाईकोर्ट का यह फैसला लोकतंत्र और संविधान की भावना को मजबूत करने वाला है। उनके अनुसार अब सरकार को अदालत में अपना जवाब देना होगा और उसके बाद ही आगे की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
आपको क्या लगता है… क्या उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव तुरंत करा दिए जाने चाहिए? या फिर सरकार को पहले नई व्यवस्था तैयार करनी चाहिए? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए।



