कब से शुरू हो रही है जगन्नाथ रथ यात्रा? जानिए महत्व, इतिहास और चमत्कारी मान्यताएं
कब से शुरू हो रही है जगन्नाथ रथ यात्रा? जिसके मात्र दर्शन से ही मिट जाते हैं सभी पाप…. क्या सच में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के केवल दर्शन मात्र से जीवन भर के पाप नष्ट हो जाते हैं? क्या इस दिव्य यात्रा में शामिल होने से मोक्ष की प्राप्ति होती है? अगर आपके मन में भी ऐसे सवाल हैं, तो आज हम आपको बताएंगे जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 की पूरी कहानी, उसका इतिहास, महत्व और वो रहस्य जिसे जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे!
दोस्तों, भारत की आध्यात्मिक परंपराओं में यदि किसी पर्व का सबसे ज्यादा इंतजार किया जाता है, तो वह है पुरी की विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा। ओडिशा के पवित्र शहर पुरी में निकलने वाली यह भव्य यात्रा सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का महासागर है। हर साल लाखों भक्त भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं।
अब सबसे पहले सबसे महत्वपूर्ण सवाल पर चलते है की इस साल 2026 में जगन्नाथ रथ यात्रा कब से शुरू होगी? तो दोस्तों आपको बतादे की ओडिशा के पुरी में आयोजित होने वाली विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 की तारीखें सामने आ चुकी हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई 2026, गुरुवार से शुरू होगी। और यह पवित्र यात्रा 24 जुलाई 2026 को बहुदा यात्रा यानी वापसी यात्रा के साथ संपन्न होगी। कुल मिलाकर यह दिव्य आयोजन पूरे 9 दिनों तक चलेगा। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा की दिव्य प्रतिमाओं को विशाल और भव्य रथों में विराजमान किया जाता है। इसके बाद ये रथ पुरी के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर से निकलकर लगभग 3 किलोमीटर दूर स्थित गुंडीचा मंदिर तक पहुंचते हैं, जिसे भगवान की मौसी का घर माना जाता है। वहां भगवान सात दिनों तक विश्राम करते हैं और फिर बहुदा यात्रा के माध्यम से वापस अपने धाम लौटते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जगन्नाथ रथ यात्रा का दर्शन करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति भाव से भगवान के रथ के दर्शन करता है, उसके पापों का नाश होता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। वहीं जो भक्त भगवान के रथ को खींचने का सौभाग्य प्राप्त करता है, उसे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस दिव्य यात्रा में शामिल होने के लिए पुरी पहुंचते हैं।
अब जानते हैं इस यात्रा के पीछे की अद्भुत कथा के बाते में तो दोस्तों जगन्नाथ रथ यात्रा का इतिहास भी बेहद रोचक और रहस्यमयी माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन भगवान जगन्नाथ का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा को रत्न सिंहासन से उतारकर स्नान मंडप में ले जाया जाता है, जहां उन्हें 108 पवित्र कलशों के जल से शाही स्नान कराया जाता है। लेकिन इसके बाद कुछ ऐसा होता है जो बेहद रहस्यमयी माना जाता है। मान्यता है कि शाही स्नान के बाद भगवान जगन्नाथ बीमार हो जाते हैं और उन्हें तेज ज्वर आ जाता है। इसके बाद उन्हें 15 दिनों तक एक विशेष कक्ष में विश्राम के लिए रखा जाता है, जहां केवल मंदिर के प्रमुख सेवक और वैद्य ही प्रवेश कर सकते हैं। इस अवधि में भक्त भगवान के दर्शन नहीं कर पाते।
पंद्रह दिनों के विश्राम के बाद आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भव्य रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है। यात्रा शुरू होने से पहले एक विशेष परंपरा निभाई जाती है, जिसे ‘छेरा पहरा’ कहा जाता है। इस रस्म में पुरी के गजपति महाराज स्वयं सोने की झाड़ू से भगवान के रथों के आसपास सफाई करते हैं। यह परंपरा इस बात का प्रतीक है कि भगवान के सामने राजा और प्रजा सभी समान हैं। इसके बाद रथों को खींचने की प्रक्रिया शुरू होती है और पूरा पुरी शहर जय जगन्नाथ के जयकारों से गूंज उठता है।
तो दोस्तों, 16 जुलाई 2026 से शुरू होने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, विश्वास और मोक्ष का महापर्व है। कहा जाता है कि भगवान जगन्नाथ के रथ के दर्शन करने वाला कभी खाली हाथ नहीं लौटता। यही कारण है कि हर साल इस दिव्य यात्रा का इंतजार देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के करोड़ों भक्त बड़ी उत्सुकता से करते हैं। अगर आप भी भगवान जगन्नाथ में श्रद्धा रखते हैं तो कमेंट में “जय जगन्नाथ” लिखिए और ऐसी ही धार्मिक और रहस्यमयी खबरों के लिए चैनल को Subscribe करना बिल्कुल न भूलें।
