दोस्तों, तैयार हो जाइए एक बड़े बदलाव के लिए, जो ई-कॉमर्स की दुनिया में तहलका मचाने वाला है! अब ‘मेड इन इंडिया’ प्रोडक्ट्स ढूंढना होगा आसान, क्योंकि सरकार ला रही है कंट्री ऑफ ओरिजिन का नया फिल्टर! हाँ, आपने सही सुना! हर पैकेज्ड सामान अब बताएगा कि वह कहाँ बना है, और आपको मैन्युअल चेकिंग की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स जैसे अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर ये फिल्टर सर्चेबल और सॉर्टेबल होगा। मतलब आप सिर्फ लोकल प्रोडक्ट्स ही नहीं, बल्कि इम्पोर्टेड सामान भी अलग से देख पाएंगे। अब कोई भी प्रोडक्ट का ओरिजिन छिप नहीं सकेगा।
सरकार की योजना है कि ये नियम 2026 से लागू हो और इसके पीछे मकसद साफ है – डिजिटल मार्केटप्लेस में ट्रांसपेरेंसी बढ़ाना और लोकल मैन्युफैक्चरर्स को बराबरी का मौका देना।
पिछले कुछ सालों में कई कंज्यूमर्स की शिकायतें आईं कि ‘मेड इन इंडिया’ प्रोडक्ट्स ढूंढना मुश्किल हो रहा है। यही वजह है कि डिपार्टमेंट ऑफ कंज्यूमर अफेयर ने इसे मेंडेटरी करने का प्रस्ताव रखा। अब कंज्यूमर सिर्फ क्लिक करेंगे और देख पाएंगे कि उनका प्रोडक्ट 100% इंडियन है या इम्पोर्टेड।
विशेषज्ञों का कहना है कि इससे छोटे और लोकल ब्रांड्स को 20-30% तक ज्यादा सेल्स मिल सकती हैं, क्योंकि ‘मेड इन इंडिया’ कैटेगरी सर्च में टॉप पर आएगी। और हाँ, ये बदलाव सिर्फ कंज्यूमर के लिए ही नहीं, बल्कि ऑथोरिटीज के लिए भी आसान होगा – फेक ओरिजिन वाले प्रोडक्ट्स अब आसानी से पकड़ में आएंगे।
तो दोस्तों, ये सिर्फ एक नियम नहीं, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ का बड़ा कदम है। अब आपके लिए इन्फॉर्म्ड बायिंग आसान होगी, मार्केट में बराबरी का मौका बढ़ेगा और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स अभी से तैयार हो रहे हैं टेक्निकल अपडेट के लिए।
कुल मिलाकर, ये बदलाव ई-कॉमर्स को और कंज्यूमर-फ्रेंडली, ट्रस्टेबल और कंपेटिटिव बनाएगा। तो तैयार हो जाइए, क्योंकि अब भारत के हर शॉपिंग क्लिक में ट्रांसपेरेंसी और लोकल पावर दिखेगी।
ये है वो बदलाव, जो डिजिटल मार्केट की दिशा ही बदल देगा!



