Bharat Tiwari Encounter jise mansik vishipt bataya usi ki hogi nyayik janch

Bharat Tiwari Encounter: जिसे पागल बताकर एनकाउंटर किया, उसी की होगी न्यायिक जांच

सरेंडर… एनकाउंटर… फिर न्यायिक जांच! आखिर भरत तिवारी केस का सच क्या है?…. जिस युवक को पुलिस ने पहले मानसिक विक्षिप्त यानी पागल बताया… फिर उसी का एनकाउंटर कर दिया। लेकिन अब… उसी एनकाउंटर की होगी न्यायिक जांच! आखिर ऐसा क्या हुआ कि सरकार को खुद रिटायर्ड हाई कोर्ट जज से जांच कराने का फैसला लेना पड़ा? क्या ये असली मुठभेड़ थी… या फिर एक ऐसा राज, जो अब पूरे बिहार की राजनीति को हिला सकता है?

दोस्तों, ये मामला है बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव का। भरत भूषण तिवारी… एक ऐसा नाम जो कुछ दिन पहले तक शायद ही किसी ने सुना होगा। लेकिन अब यही नाम पूरे देश में चर्चा का विषय बन चुका है। सोशल मीडिया पर भरत के कई वीडियो वायरल हुए। वीडियो में वह हथियार लेकर पुलिस-प्रशासन और सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर करता दिखाई दिया। कुछ वीडियो में वह फायरिंग करता भी नजर आया।

इसके बाद पुलिस उसे पकड़ने पहुंची। काफी देर तक तनाव का माहौल बना रहा… और फिर खबर आई कि भरत तिवारी पुलिस एनकाउंटर में मारा गया। लेकिन… कहानी यहीं खत्म नहीं हुई… भरत की मां और भाई का आरोप है कि पुलिस जो कहानी बता रही है… वह पूरी तरह झूठी है। परिवार का कहना है कि भरत ने आखिर में अपना हथियार फेंक दिया था… उसने सरेंडर कर दिया था… लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने उसे गोली मार दी।

भरत की मां का कहना है… “मेरा बेटा मानसिक रूप से बीमार नहीं था। वह BSc पास था… नौकरी की तैयारी कर रहा था… जब नौकरी नहीं मिली तो समाज सेवा करने लगा।” परिवार का दावा है कि वह बाढ़ पीड़ितों की आवाज उठा रहा था… लेकिन उसकी बात किसी ने नहीं सुनी। यानी एक तरफ पुलिस की कहानी… दूसरी तरफ परिवार के गंभीर आरोप… और इसी वजह से अब पूरे मामले पर सवाल उठ रहे हैं।

अब सुनिए पुलिस का पक्ष… पुलिस का कहना है कि भरत के पास अवैध हथियार था। जब पुलिस उसे पकड़ने पहुंची… तब उसने पुलिस टीम पर कई राउंड फायरिंग की। यही नहीं… पुलिस ने भरत के पिता और भाई के खिलाफ भी FIR दर्ज कर दी। आरोप लगाया गया कि उन्हें हथियार की जानकारी थी और उन्होंने सरकारी काम में बाधा पहुंचाई। एनकाउंटर के विरोध में सड़क जाम करने वालों पर भी अलग केस दर्ज किया गया। यानी… दोनों पक्षों की कहानी बिल्कुल अलग-अलग है।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल तब उठा… जब सरकार ने खुद इस पूरे मामले में न्यायिक जांच कराने का फैसला लिया। सरकार ने कहा कि रिटायर्ड हाई कोर्ट जज की निगरानी में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी। उधर विपक्ष ने इस एनकाउंटर को फर्जी बताया और सवाल उठाया कि… अगर जांच हो रही है… तो परिवार के खिलाफ केस क्यों दर्ज किया गया? अब इस मामले ने सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं… बल्कि राजनीति का भी बड़ा रूप ले लिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि… क्या जांच में पुलिस की कहानी सही साबित होगी… या फिर परिवार के आरोप?

अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि… क्या भरत तिवारी ने सच में पुलिस पर फायरिंग की थी?… क्या उसने सरेंडर किया था?… क्या यह पुलिस की सही कार्रवाई थी… या फिर जांच में कोई और सच्चाई सामने आएगी? इन सवालों का जवाब अब न्यायिक जांच के बाद ही मिलेगा। फिलहाल इस मामले में दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे हैं और जांच जारी है।

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