अगर लड़का-लड़की अपनी मर्जी से शारीरिक संबंध बनाएं.. सालों तक रिलेशनशिप में रहें… लेकिन बाद में दोनों एक दुसरे से शादी ना करे… तो क्या इसे रेप कहा जाएगा? दोस्तों, ये सवाल जितना बड़ा है इसका जवाब भी उतना ही तगड़ा है क्योंकि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ऐसा फैसला सुनाया है, जिस पर पूरे देश में बहस छिड़ गई है।
क्या अब शादी का वादा टूटने पर रेप का केस नहीं चलेगा? या फिर इसके पीछे कोई कानूनी शर्त भी है? पूरी खबर समझिए… क्योंकि आधी जानकारी आपको मुश्किल में डाल सकती है। आज की खबर सिर्फ एक कोर्ट के फैसले की नहीं है बल्कि ये फैसला प्यार, रिश्ते, भरोसे और कानून… चारों से जुड़ा हुआ है और अगर आप सोशल मीडिया इस्तेमाल करते हैं… या रिलेशनशिप में हैं… तो यह खबर आपके लिए और भी ज्यादा जरूरी है।
कोर्ट ने साफ कहा… “अगर दो वयस्कों के बीच लंबे समय तक सहमति से शारीरिक संबंध बने हैं, तो बाद में शादी न होने मात्र से उसे दुष्कर्म नहीं कहा जा सकता।” लेकिन आखिर पूरा मामला क्या है? कोर्ट ने ऐसा क्यों कहा? और किन परिस्थितियों में शादी का झूठा वादा रेप माना जाएगा?
दोस्तों, यह मामला कानपुर नगर का है। पीड़िता ने मार्च 2024 में एफआईआर दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि उसकी मुलाकात फेसबुक पर एक युवक से हुई। दोस्ती प्यार में बदली… फिर युवक ने शादी का वादा किया। आरोप है कि जुलाई 2022 से लेकर नवंबर 2023 तक दोनों के बीच करीब 30 से 40 बार शारीरिक संबंध बने। लेकिन बाद में युवक ने शादी से इनकार कर दिया… और कुछ ही समय बाद किसी दूसरी लड़की से विवाह कर लिया। इसके बाद युवती ने दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचा… और यहीं से कहानी ने बड़ा मोड़ ले लिया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पीड़िता के धारा 164 के बयान को ध्यान से देखा। उस बयान में पीड़िता ने खुद स्वीकार किया कि दोनों के बीच संबंध सहमति से बने थे। कोर्ट ने यह भी माना कि… पीड़िता बालिग थी… वह एक बीमा एजेंट थीं… FIR में पहली घटना की तारीख, समय और स्थान का स्पष्ट उल्लेख नहीं था।
मुकदमा तब दर्ज हुआ जब युवती को युवक की शादी की जानकारी मिली। इसके बाद न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के कई पुराने फैसलों का हवाला देते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा… शादी का वादा टूट जाना और शुरू से ही झूठा वादा करके धोखा देना, दोनों अलग-अलग बातें हैं।
अगर शुरुआत से ही शादी करने का इरादा नहीं था और केवल धोखे से संबंध बनाए गए, तो मामला अलग हो सकता है। लेकिन यदि दोनों के बीच लंबे समय तक सहमति से संबंध रहे और बाद में किसी कारण शादी नहीं हो सकी… तो केवल इसी आधार पर दुष्कर्म का मामला नहीं बनता। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।
अब सबसे बड़ा सवाल ये है की… क्या इस फैसले के बाद शादी का वादा करके संबंध बनाने वाले सभी लोगों को राहत मिल जाएगी? तो इसका जवाब है – नहीं, क्योंकि अदालत को यह साबित हो जाए कि शुरुआत से ही शादी करने का कोई इरादा नहीं था और सिर्फ धोखा देकर सहमति हासिल की गई थी तो ऐसे मामलों में कानून आज भी दुष्कर्म की धाराएं लागू कर सकता है। यानी… हर मामला अपने तथ्यों और सबूतों के आधार पर अलग-अलग तय होगा।
तो दोस्तों… इलाहाबाद हाई कोर्ट का यह फैसला केवल एक केस तक सीमित नहीं है… बल्कि भविष्य में आने वाले कई मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल माना जा सकता है। क्या आपको लगता है कि हाई कोर्ट का यह फैसला सही है? या इससे महिलाओं को न्याय मिलने में मुश्किल बढ़ सकती है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।



