कोई महिला आजीविका के लिए वेश्यावृत्ति करे, तो वह जगह कोठा नहीं, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

koi mahila aajeevika ke liye veshyavritti kare to wah jagah kotha nahin supreme court ka bada faisla

अगर कोई महिला अपने घर में देह व्यापार करती है… तो क्या उसका घर कोठा कहलाएगा…? अगर आपका जवाब ‘हाँ’ है, तो जरा रुकिए… क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने 298 पन्नों के फैसले में ऐसी बात कह दी है जिसने पूरे देश में नई बहस छेड़ दी है। और इस फैसले को सुनने के बाद बहुत से लोग कह रहे हैं, “अरे, हमें तो कानून की असली बात पता ही नहीं थी!” आखिर पूरा मामला क्या है…? चलिए समझते हैं।

दोस्तों, वेश्यावृत्ति यानी Prostitution एक ऐसा विषय है जिस पर लोग खुलकर बात कम करते हैं, लेकिन राय सबकी होती है। और अब इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट का एक बड़ा फैसला सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने 70 साल पुराने कानून की व्याख्या करते हुए साफ कहा है कि अगर कोई महिला अकेले अपने घर में रहकर अपनी आजीविका के लिए वेश्यावृत्ति करती है और वहाँ कोई दलाल, कोई बिचौलिया या कोई दूसरी महिला शामिल नहीं है, तो उस घर को कानूनन वेश्यालय यानी कोठा नहीं माना जाएगा। अब यह सुनकर बहुत से लोग चौंक गए हैं, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच 1956 के अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम (ITPA) का विश्लेषण कर रही थी। कोर्ट ने कहा कि इस कानून का मकसद वेश्यावृत्ति करने वाली महिलाओं को अपराधी बनाना नहीं था। बल्कि इस कानून का असली उद्देश्य मानव तस्करी को रोकना, महिलाओं के शोषण को रोकना और दलालों व संगठित देह व्यापार पर कार्रवाई करना था। यानी कानून की नजर में सबसे बड़ा अपराध वह व्यक्ति है जो किसी महिला को इस धंधे में धकेलता है या उससे कमाई करता है।

अब आपके मन में सवाल आ सकता है कि अगर वेश्यावृत्ति अपराध नहीं है, तो फिर पुलिस कार्रवाई क्यों करती है? यहीं पर आता है कानून का दूसरा पहलू। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून की कुछ धाराएँ आज भी पूरी तरह लागू हैं। उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति स्कूल, मंदिर, अस्पताल या किसी सार्वजनिक स्थान के पास वेश्यावृत्ति करता है तो यह अपराध माना जा सकता है। इसी तरह अगर कोई सड़क पर खड़े होकर ग्राहकों को बुलाता है, इशारे करता है या लोगों को आकर्षित करने की कोशिश करता है, तो यह भी कानून के दायरे में आता है। मतलब साफ है कि कोर्ट ने वेश्यावृत्ति को खुली छूट नहीं दी है।

अब आते हैं उस हिस्से पर जिसने पूरे देश में चर्चा छेड़ दी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोई महिला अकेले अपने घर में रहकर यह काम कर रही है और उस जगह पर कोई दूसरी महिला नहीं है, कोई दलाल नहीं है और कोई संगठित गिरोह नहीं है, तो उस घर को वेश्यालय नहीं कहा जा सकता। यानी सिर्फ इस आधार पर कि वहाँ वेश्यावृत्ति हो रही है, किसी घर को कोठा घोषित नहीं किया जा सकता।

लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि अब वेश्यावृत्ति पूरी तरह कानूनी हो गई है? इसका जवाब है—नहीं। सुप्रीम Court ने ऐसा कहीं नहीं कहा कि वेश्यावृत्ति पूरी तरह कानूनी है। कोर्ट ने यह भी नहीं कहा कि अब कोई भी कहीं भी यह काम कर सकता है। अदालत सिर्फ यह बता रही है कि कानून का असली उद्देश्य क्या था और उसे कैसे समझा जाना चाहिए।

अपने फैसले में कोर्ट ने यह भी बताया कि कानून के नाम में “अनैतिक” शब्द क्यों जोड़ा गया था। करीब सौ साल पहले महिलाओं की तस्करी और जबरन देह व्यापार के मामले बहुत ज्यादा थे। समाज इसे अनैतिक मानता था, इसलिए कानून के नाम में यह शब्द जोड़ा गया। लेकिन कानून का फोकस हमेशा तस्करों, दलालों और शोषण करने वालों पर रहा, न कि उन महिलाओं पर जो खुद इस स्थिति में फँसी हुई थीं।

तो दोस्तों, सुप्रीम कोर्ट ने यह नहीं कहा कि वेश्यावृत्ति अच्छी चीज है और न ही यह कहा कि इसे पूरी तरह वैध कर दिया जाए। लेकिन कोर्ट ने यह जरूर कहा है कि कानून का इस्तेमाल करते समय उसके असली उद्देश्य को समझना जरूरी है। और वह उद्देश्य है महिलाओं का शोषण रोकना, मानव तस्करी पर लगाम लगाना और संगठित देह व्यापार के नेटवर्क को खत्म करना, न कि हर उस महिला को अपराधी बना देना जो किसी मजबूरी में यह काम कर रही है।

अब इस फैसले पर आपकी क्या राय है? क्या सुप्रीम कोर्ट ने कानून की सही व्याख्या की है, या आपको लगता है कि इस मुद्दे पर और सख्त नियम होने चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए। वीडियो पसंद आया हो तो लाइक और शेयर करना न भूलें, और ऐसी ही बड़ी खबरों की आसान और सटीक जानकारी के लिए चैनल को सब्सक्राइब जरूर करें।

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