देश में एलपीजी गैस की कीमतों को लेकर एक बार फिर बड़ी चर्चा शुरू हो गई है। साल 2025 के दौरान जहां कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दामों में बड़ी राहत देखने को मिली, वहीं घरेलू रसोई गैस आम आदमी के लिए महंगी साबित हुई। आंकड़ों के मुताबिक 19 किलो वाले कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में करीब 238 रुपये तक की कटौती की गई, जिससे होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारियों को काफी राहत मिली। वहीं दूसरी ओर 14.2 किलो वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में लगभग 50 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के मासिक बजट पर सीधा असर पड़ा।
सरकार और तेल कंपनियों का कहना है कि एलपीजी के दाम अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर-रुपया विनिमय दर और परिवहन लागत पर निर्भर करते हैं। यही कारण है कि कॉमर्शियल गैस की कीमतों में गिरावट देखने को मिली, जबकि घरेलू गैस की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। कई राज्यों में घरेलू गैस सिलेंडर के दाम 900 रुपये के आसपास पहुंच गए, जिससे रसोई का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि साल 2026 में गैस की कीमतों का रुख क्या रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं और सरकार सब्सिडी नीति पर दोबारा विचार करती है, तो आने वाले समय में घरेलू एलपीजी सिलेंडर सस्ता हो सकता है। साथ ही चुनावी वर्ष और महंगाई को देखते हुए सरकार आम जनता को राहत देने के लिए कोई बड़ा फैसला ले सकती है।
कुल मिलाकर 2025 का लेखा-जोखा साफ बताता है कि जहां व्यापारियों को राहत मिली, वहीं घरेलू उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ीं। अब सबकी नजर 2026 पर टिकी है कि क्या रसोई गैस फिर से आम आदमी की पहुंच में आएगी या महंगाई का बोझ यूं ही बना रहेगा।



