अगर आपकी गाड़ी पर FASTag लगा है, तो ये खबर आपके लिए बहुत काम की है! क्योंकि अब FASTag को लेकर ऐसा बदलाव सामने आया है, जिसे जानने के बाद आप कहेंगे—अरे! बैंक बदलने के लिए FASTag ही क्यों बदलना पड़े? जी हां! अब FASTag का स्टिकर वही रहेगा, गाड़ी वही रहेगी, नंबर वही रहेगा, लेकिन FASTag से जुड़ा बैंक बदला जा सकेगा। मतलब साफ है—FASTag में भी शुरू हो गया है पोर्ट का खेल! लेकिन ठहरिए… सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि बैंक बदल जाएगा। असली सवाल है कि आखिर ये OneTag क्या है? मोबाइल से FASTag का बैंक कैसे बदलेगा? पुराने FASTag में मौजूद पैसे का क्या होगा? और सबसे बड़ा सवाल—क्या बैंक बदलने के बाद भी टोल प्लाजा पर FASTag पहले की तरह काम करेगा या वहां कोई नया झंझट खड़ा होगा? अगर आपके पास FASTag है तो खबर को आखिर तक देखिए, क्योंकि इस खबर के अंत में हम आपको ये भी बताएंगे कि टोल प्लाजा पर आपका FASTag सिर्फ कुछ सेकेंड में आखिर कैसे काम कर जाता है।
अब तक FASTag यूजर्स के लिए बैंक बदलना कोई छोटी बात नहीं थी। मान लीजिए आपका FASTag एक बैंक से जुड़ा हुआ है और अब आप उसे किसी दूसरे बैंक से जोड़ना चाहते हैं। पुरानी व्यवस्था में आपको पुराने FASTag अकाउंट को बंद कराने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता था। फिर नए बैंक के साथ दोबारा ऑनबोर्डिंग और कई मामलों में नया FASTag स्टिकर! यानी बैंक बदला तो FASTag बदलने का झंझट भी! लेकिन अब यहीं पर आया है बड़ा बदलाव—OneTag सर्विस। इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा मतलब है FASTag का स्टिकर बदले बिना बैंक बदलने की सुविधा। यानी आपकी गाड़ी की विंडशील्ड पर लगा FASTag वहीं रहेगा, लेकिन उसके पीछे जुड़ा बैंक बदल सकता है। अब इसे मोबाइल SIM के उदाहरण से समझिए। जैसे मोबाइल नंबर वही रखकर आप एक कंपनी से दूसरी कंपनी में पोर्ट कर लेते हैं, वैसे ही FASTag के मामले में भी बैंक बदलने की सुविधा का रास्ता तैयार किया गया है। स्टिकर वही, बैंक नया! अब सवाल है—ये काम होगा कैसे?
इसके लिए FASTag यूजर को राजमार्ग यात्रा ऐप के जरिए OneTag सेक्शन में जाना होगा। सबसे पहले ऐप में लॉग-इन कीजिए, फिर OneTag सेक्शन में जाइए। इसके बाद आपकी FASTag eligibility यानी पात्रता और जरूरी security checks किए जाएंगे। वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद आपकी consent यानी सहमति ली जाएगी और फिर सामने आएगा बैंकों का विकल्प। आप उपलब्ध सूची में से अपना नया बैंक चुन सकेंगे। इसके बाद पुराने बैंक से जुड़े refund settlement की प्रक्रिया पूरी होगी और प्रक्रिया पूरी होने पर आपका वही FASTag नए बैंक से जुड़ जाएगा। न कोई नया स्टिकर, न विंडशील्ड पर चिपकाने की नई कवायद और न पुराने FASTag को फाड़कर हटाने का झंझट! लेकिन यहां एक सवाल फिर भी बचता है—टोल प्लाजा को कैसे पता चलेगा कि अब FASTag का बैंक बदल चुका है? यहीं से शुरू होता है असली डिजिटल खेल!
ध्यान से सुनिए… OneTag का मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि FASTag लेन में अब कोई नया सिस्टम आपके सामने दिखाई देगा। आप की गाड़ी पहले की तरह FASTag लेन में जाएगी। टोल प्लाजा पर लगा सिस्टम आपके FASTag को स्कैन करेगा। आपसे कोई नया कार्ड नहीं मांगा जाएगा, कोई नया स्टिकर नहीं दिखाना होगा और गाड़ी को किसी अतिरिक्त प्रक्रिया के लिए रोकने की जरूरत नहीं होगी। आपके लिए सब कुछ पहले जैसा ही रहेगा। फर्क सिर्फ इतना होगा कि बैकएंड में आपके FASTag से जुड़ी बैंकिंग जानकारी अपडेट हो चुकी होगी। और इस पूरे सिस्टम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है NETC यानी National Electronic Toll Collection।
अब इसे बिल्कुल आसान भाषा में समझिए। जब आपकी गाड़ी टोल प्लाजा पर पहुंचती है, FASTag स्कैन होता है। टोल प्लाजा का सिस्टम FASTag से जुड़ी जानकारी को आगे भेजता है। फिर NETC यानी National Electronic Toll Collection सिस्टम टैग की जानकारी को वेरिफाई करने की प्रक्रिया में मदद करता है। इसके बाद वाहन की कैटेगरी यानी vehicle class के हिसाब से टोल राशि की प्रक्रिया होती है। संबंधित बैंक से टोल भुगतान की रकम डेबिट होती है, ट्रांजैक्शन की जानकारी सिस्टम में जाती है और टोल प्लाजा को भुगतान की पुष्टि मिलती है। इसके बाद आपकी गाड़ी आगे निकल जाती है। अब सुनने में आपको लग रहा होगा कि भाई, ये तो बहुत लंबा सिस्टम है! लेकिन यहां असली कमाल देखिए—ये पूरी प्रक्रिया आमतौर पर कुछ ही सेकेंड में पूरी हो जाती है। यानी आपके सामने सिर्फ एक FASTag लेन दिखती है, लेकिन उसके पीछे बैंक, टोल सिस्टम और डिजिटल नेटवर्क के बीच कई स्टेप्स तेजी से पूरे हो रहे होते हैं।
FASTag के पीछे इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण तकनीकों में से एक है RFID यानी Radio Frequency Identification। सीधी भाषा में कहें तो RFID रेडियो फ्रीक्वेंसी के जरिए FASTag में मौजूद जानकारी को पढ़ने में मदद करता है। यानी गाड़ी टोल लेन में पहुंची, FASTag स्कैन हुआ, जानकारी सिस्टम तक गई और भुगतान की प्रक्रिया शुरू! इसी वजह से FASTag का सबसे बड़ा फायदा है कि टोल पर कैश लेकर लाइन में खड़े रहने की जरूरत कम होती है। समय बचता है, ईंधन की बचत होती है और टोल भुगतान डिजिटल तरीके से होता है। लेकिन OneTag का फायदा सिर्फ सुविधा तक सीमित नहीं है। इसके पीछे एक और बड़ा मकसद बताया जा रहा है।
सोचिए… अगर हर बार बैंक बदलने पर नया FASTag बनाना पड़े, तो पुराने टैग का क्या होगा? फिर नया टैग बनाना, डिस्पैच करना, री-इश्यू करना और पुराने फिजिकल टैग का इस्तेमाल खत्म होना। इस पूरी प्रक्रिया में पैसा भी खर्च होता है और संसाधन भी। OneTag जैसी पोर्टेबिलिटी व्यवस्था से बार-बार नए फिजिकल FASTag जारी करने की जरूरत कम हो सकती है। इसका मतलब—कम री-इश्यू, कम फिजिकल वेस्ट और कम झंझट। यानी फायदा सिर्फ FASTag यूजर को नहीं, बल्कि सिस्टम और संसाधनों को भी हो सकता है।
बस आपको चार बातें याद रखना है। पहली—FASTag का स्टिकर बदले बिना बैंक बदलने की सुविधा। दूसरी—OneTag के जरिए स्विचिंग की प्रक्रिया राजमार्ग यात्रा ऐप से की जा सकती है। तीसरी—टोल प्लाजा पर आपकी प्रक्रिया पहले की तरह ही रहेगी। और चौथी—पूरा खेल बैकएंड में डिजिटल तरीके से होगा। यानी आपकी गाड़ी टोल से गुजरती रहेगी, FASTag स्कैन होता रहेगा और आपको शायद पता भी नहीं चलेगा कि पीछे सिस्टम ने कितने स्टेप्स पूरे कर दिए!
तो अगली बार FASTag से जुड़ा बैंक बदलने का मन हो, तो हो सकता है आपको सबसे पहले विंडशील्ड पर हाथ डालकर पुराना स्टिकर उखाड़ने की जरूरत ही न पड़े। क्योंकि FASTag अब सिर्फ FAST नहीं, पोर्टेबल भी होने की दिशा में बढ़ रहा है! और यही है इस खबर का सबसे बड़ा ट्विस्ट। अगर आपकी गाड़ी पर FASTag लगा है, तो इस खबर को उन लोगों तक जरूर पहुंचाइए जो अक्सर हाईवे पर सफर करते हैं। क्योंकि अगली बार बैंक बदलने पर FASTag बदलने की जरूरत पड़ेगी या नहीं—इसका जवाब अब बदल चुका है।



