चिराग पासवान मुख्यमंत्री बनेंगे? जी हां… आपने बिल्कुल सही सुना! जिस बिहार में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर सियासी गणित हर बार बदलता रहा है, उसी बिहार में अब NDA के अंदर से ही एक बड़ा दावा सामने आया है! LJP रामविलास ने साफ कह दिया है—सरकार हमारी होगी और मुख्यमंत्री चिराग पासवान होंगे! लेकिन जरा रुकिए… सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि चिराग मुख्यमंत्री बनेंगे या नहीं। सवाल ये है कि क्या चिराग पासवान ने बिहार की सत्ता के लिए अभी से अपना दावा ठोक दिया है? क्या NDA के भीतर मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर नया सियासी खेल शुरू हो गया है? और सबसे बड़ा सवाल—क्या बीजेपी इस दावे को चुपचाप देखेगी? क्योंकि पटना में शुक्रवार को जो हुआ, उसने बिहार की सियासत में खलबली मचा दी है।
दरअसल, शुक्रवार यानी 4 सितंबर 2026 को पटना में LJP रामविलास का एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र विवेक और बिहार से आने वाले पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों का स्वागत किया गया। इस कार्यक्रम में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान भी मौजूद रहे। चिराग पासवान ने कार्यकर्ताओं को संबोधित किया और संगठन को मजबूत बनाने का आह्वान किया। लेकिन कार्यक्रम के दौरान पार्टी के नेताओं की तरफ से जो बयान सामने आया, उसने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को तेज कर दिया। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राजू तिवारी ने कहा कि पार्टी को पूरा विश्वास है कि वह अपने नेता चिराग पासवान के नेतृत्व में लगातार आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि आने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी के सभी कार्यकर्ता अपनी पार्टी की सरकार बनाने का संकल्प लेते हैं और चिराग पासवान को मुख्यमंत्री बनाने का जो संकल्प पहले से लिया गया है, उसे पूरा किया जाएगा। अब सवाल ये है—क्या ये सिर्फ कार्यकर्ताओं का जोश था या फिर बिहार की सत्ता को लेकर भविष्य की बड़ी तैयारी का संकेत?
क्योंकि अगर सिर्फ राष्ट्रीय महासचिव ऐसा बयान देते तो इसे पार्टी कार्यकर्ताओं का उत्साह कहा जा सकता था, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। इसके बाद पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र विवेक ने भी मुख्यमंत्री पद को लेकर बड़ा बयान दे दिया। मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए सुरेंद्र विवेक ने कहा कि 2029 या 2030 में जो भी चुनाव होना है, अगर उस समय बिहार में एलजेपी रामविलास नंबर वन पार्टी बनती है, तो स्वाभाविक है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान मुख्यमंत्री होंगे। अब इस बयान के मायने समझिए। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सीधे तौर पर कह रहे हैं कि अगर उनकी पार्टी बिहार में नंबर वन बनती है, तो मुख्यमंत्री पद के लिए चिराग पासवान का दावा होगा। यानी मामला अब सिर्फ एक नेता के बयान तक सीमित नहीं रहा। राष्ट्रीय महासचिव ने मुख्यमंत्री बनाने के संकल्प की बात कही और प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री पद को लेकर तस्वीर और साफ कर दी। यही वजह है कि बिहार की राजनीति में इस बयान को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है।
अब जरा तस्वीर का दूसरा हिस्सा देखिए। चिराग पासवान की पार्टी एनडीए का हिस्सा है। यानी एक तरफ गठबंधन है और दूसरी तरफ उसी गठबंधन के सहयोगी दल की तरफ से मुख्यमंत्री पद का दावा सामने आ रहा है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है—बीजेपी का रुख क्या होगा? क्या बीजेपी इसे सिर्फ पार्टी का राजनीतिक लक्ष्य मानकर आगे बढ़ जाएगी या फिर इस बयान के बाद एनडीए के भीतर सियासी चर्चा तेज होगी? क्योंकि बिहार में मुख्यमंत्री की कुर्सी सिर्फ एक कुर्सी नहीं है, बल्कि ये सत्ता और राजनीतिक शक्ति का सबसे बड़ा केंद्र है। और जब कोई सहयोगी दल कहता है कि हमारी पार्टी नंबर वन होगी और हमारे नेता मुख्यमंत्री होंगे, तो राजनीति में उसके मायने बहुत दूर तक जाते हैं।
बिहार की राजनीति में सत्ता का गणित हमेशा से बेहद दिलचस्प रहा है। लंबे समय तक नीतीश कुमार मुख्यमंत्री रहे और अब बिहार की सत्ता में सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री हैं। लेकिन इसी बीच एलजेपी रामविलास की तरफ से भविष्य के लिए चिराग पासवान का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए सामने आ गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या आने वाले समय में बिहार की राजनीति में एक नई चर्चा शुरू होगी—सम्राट चौधरी या चिराग पासवान? हालांकि अभी इसे सीधी राजनीतिक भिड़ंत कहना जल्दबाजी होगी, क्योंकि चुनाव अभी भविष्य की बात है। गठबंधन के समीकरण बदल सकते हैं, सीटों का गणित बदल सकता है और सबसे बड़ा फैक्टर जनता का फैसला होगा। लेकिन राजनीति में बड़े दावे अक्सर चुनाव से काफी पहले ही किए जाते हैं और एलजेपी रामविलास ने अपना दावा अभी से सामने रख दिया है।
चिराग पासवान फिलहाल केंद्र की राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन बिहार की राजनीति में उनका नाम पहले से ही एक महत्वपूर्ण युवा चेहरे के तौर पर देखा जाता रहा है। अब उनकी पार्टी खुलकर कह रही है कि बिहार में अपनी सरकार बनानी है और अगर पार्टी नंबर वन बनती है, तो चिराग पासवान मुख्यमंत्री होंगे। यानी संदेश साफ है कि चिराग की राजनीति का अगला पड़ाव सिर्फ दिल्ली नहीं, बल्कि पटना भी हो सकता है। लेकिन यहां फिर वही सवाल खड़ा होता है—क्या एलजेपी रामविलास इतनी ताकत हासिल कर पाएगी कि बिहार में नंबर वन पार्टी बन सके? क्या जनता चिराग के नेतृत्व को इतना बड़ा जनादेश देगी? और क्या एनडीए के भीतर बाकी दल इस दावे को स्वीकार करेंगे?
इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा सस्पेंस यही है कि चिराग पासवान खुद क्या चाहते हैं? क्या पार्टी नेताओं का ये बयान सिर्फ संगठन का लक्ष्य है या फिर चिराग पासवान के राजनीतिक भविष्य को लेकर एक सोची-समझी रणनीति? क्योंकि मंच पर चिराग पासवान मौजूद थे, कार्यकर्ताओं के बीच मौजूद थे और उसी कार्यक्रम में पार्टी के नेताओं ने मुख्यमंत्री पद को लेकर बड़ा दावा कर दिया। अब इस बयान के बाद निगाहें टिकी हैं बीजेपी पर, एनडीए के दूसरे सहयोगी दलों पर और सबसे ज्यादा चिराग पासवान पर। आखिर इस दावे पर चिराग का अगला कदम क्या होगा?
तो बिहार में कहानी अब बेहद दिलचस्प हो चुकी है। एक तरफ सत्ता है, दूसरी तरफ सत्ता का दावा है। एक तरफ मौजूदा राजनीतिक समीकरण हैं और दूसरी तरफ भविष्य की मुख्यमंत्री पद की दावेदारी। एलजेपी रामविलास ने अपना पत्ता खोल दिया है—चिराग पासवान को मुख्यमंत्री बनाने का संकल्प! लेकिन क्या ये संकल्प चुनावी मैदान में वोट में बदल पाएगा? क्या एलजेपी रामविलास बिहार में नंबर वन पार्टी बन पाएगी? क्या एनडीए के भीतर इस दावे पर सहमति बनेगी? और सबसे बड़ा सवाल—क्या भविष्य में बिहार की मुख्यमंत्री की कुर्सी पर सच में चिराग पासवान बैठेंगे? इन सवालों के जवाब अभी बाकी हैं, लेकिन एक बात तय है—पटना से निकला ये बयान अब सिर्फ पटना तक सीमित नहीं रहने वाला। इसकी गूंज बिहार की सियासत से लेकर दिल्ली तक सुनाई दे सकती है। अब देखना होगा कि चिराग का दावा कितना मजबूत है, बीजेपी का रुख क्या होता है और चुनावी मैदान में जनता किसके सिर पर रखती है बिहार की सत्ता का ताज! आप बताइए—क्या चिराग पासवान को बिहार का मुख्यमंत्री बनना चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर लिखिए।



