Kejriwal ne khola cjp aandolan ka raj modi ji ko thokane aaye the stifa mangane nahi

केजरीवाल ने खोला CJP आंदोलन का राज? “मोदी जी को ठोकने आए थे, इस्तीफा मांगने नहीं”

मोदी जी को ठोकने आए थे, इस्तीफा मांगने नहीं…. CJP आंदोलन के बाद एकबार फिर से मचा सियासी बवाल…. जी हाँ दोस्तों… एक आंदोलन, एक बयान और अब ऐसा सियासी घमासान, जिसने पूरे मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। दरअसल, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने CJP आंदोलन को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिस पर बीजेपी ने तीखा पलटवार किया है। केजरीवाल ने कहा कि इस आंदोलन में शामिल लोग सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगने नहीं आए थे, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपने गुस्से का इजहार करने आए थे। और इसके बाद उन्होंने एक ऐसी लाइन कही, जिस पर अब सियासत गरमा गई है। केजरीवाल ने कहाँ, अगर क्रूर भाषा में बोलूं, तो लोग मोदी जी को “ठोकने आए थे।” अब सवाल ये है कि आखिर केजरीवाल ने ऐसा क्यों कहा? क्या CJP आंदोलन सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक सीमित था, या फिर इसके पीछे सरकार के खिलाफ बढ़ता हुआ बड़ा राजनीतिक गुस्सा था? और सबसे बड़ा सवाल, क्या बीजेपी के उस आरोप को केजरीवाल के बयान से बल मिल गया है, जिसमें CJP आंदोलन को आम आदमी पार्टी से जोड़कर देखा जाता रहा है? यही वो सवाल है, जिसने पूरे मामले को फिर से राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।

श्याम मीरा सिंह के यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में अरविंद केजरीवाल ने CJP आंदोलन को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन में जो भी लोग शामिल हुए थे, उनका मकसद सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेना नहीं था। केजरीवाल के मुताबिक, लोगों के मन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर जो गुस्सा है, वे उसका इजहार करने आए थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने जिस तरह देश को डरा और दबा रखा है, उसको लेकर लोगों में नाराजगी है। और फिर केजरीवाल ने कहा, “क्रूर भाषा में बोलूं तो मोदी जी को ठोकने आए थे।” बस, यही एक बयान अब पूरे विवाद की सबसे बड़ी वजह बन गया है। क्योंकि राजनीति में शब्द सिर्फ शब्द नहीं होते। एक नेता का एक बयान दूसरे दल के लिए हमला बन सकता है और यही अब इस मामले में होता हुआ दिखाई दे रहा है।

केजरीवाल ने यह भी कहा कि उन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि सरकार वास्तव में छात्रों की बात मान लेगी और धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो जाएगा। उनके मुताबिक, हो सकता है कि सरकार को यह अंदाजा हो गया हो कि इस आंदोलन की वजह से उसे कितना राजनीतिक नुकसान हो रहा है। यानी केजरीवाल की बात का मतलब अगर समझें, तो आंदोलन का दबाव सिर्फ सड़क तक सीमित नहीं था, बल्कि उसका असर सरकार पर भी महसूस किया जा रहा था। लेकिन क्या वाकई आंदोलन की वजह से सरकार को राजनीतिक नुकसान का अंदाजा हो गया था, या फिर यह सिर्फ केजरीवाल का राजनीतिक आकलन है? यहीं से इस कहानी में एक और सवाल खड़ा हो जाता है।

केजरीवाल के बयान के बाद बीजेपी ने भी पलटवार करने में देर नहीं की। बीजेपी ने आरोप लगाया कि CJP आंदोलन के पीछे असली ताकत कौन थी, इसका खुलासा खुद अरविंद केजरीवाल ने कर दिया है। बीजेपी ने कहा कि CJP के कथित “असली मालिक” केजरीवाल ने आखिरकार खुद ही कबूल कर लिया कि आंदोलन में सड़कों पर उतरे लोग मोदी जी को “ठोकने” आए थे। यानी बीजेपी ने केजरीवाल के बयान को सीधे राजनीतिक हथियार बना लिया। अब दोनों तरफ से बयानबाजी तेज हो चुकी है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी भी बाकी है। क्या CJP आंदोलन वास्तव में किसी राजनीतिक दल से प्रभावित था, या फिर यह छात्रों और युवाओं की अपनी नाराजगी का आंदोलन था?

इंटरव्यू में केजरीवाल से सीधा सवाल पूछा गया कि क्या CJP आंदोलन आम आदमी पार्टी की तरफ से कराया गया था? इस सवाल पर केजरीवाल ने कहा कि मुद्दा यह नहीं है कि CJP से जुड़े लोग पहले आम आदमी पार्टी में थे या नहीं। उनके मुताबिक असली मुद्दा कुछ और है। उन्होंने कहा कि नीट का पेपर लीक हुआ। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो गया, लेकिन क्या इससे पेपर लीक की समस्या खत्म हो जाएगी? केजरीवाल ने सवाल उठाया कि इसकी कोई गारंटी नहीं है। यानी उनके मुताबिक असली सवाल सिर्फ इस्तीफे का नहीं था। असली सवाल परीक्षा व्यवस्था और पेपर लीक जैसी समस्याओं का था। और यही वो मुद्दा है जिसे केजरीवाल आंदोलन की असली वजह बता रहे हैं।

लेकिन यहां भी एक बड़ा सवाल है। अगर इस्तीफा हो गया, तो फिर आंदोलन के बाद क्या बदला? क्या छात्रों की बाकी मांगें पूरी हुईं? क्या पेपर लीक जैसी समस्या पर कोई स्थायी समाधान निकला? या फिर पूरी राजनीतिक बहस सिर्फ एक इस्तीफे तक सिमटकर रह गई? केजरीवाल ने कहा कि आज भी लोग पढ़ाई और फंड से जुड़े मुद्दों की बात कर रहे हैं, लेकिन पेपर लीक की बात अब भी नहीं हो रही। यानी केजरीवाल का दावा है कि जिस मुद्दे ने छात्रों को सड़क पर उतारा था, वही मुद्दा अब राजनीतिक बयानबाजी के बीच पीछे छूट गया है।

केजरीवाल ने यह भी साफ किया कि अभी तक अभिजीत दीपके ने उनसे किसी तरह की मदद नहीं मांगी है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके साथ पार्टी में शामिल होने को लेकर भी उनसे कोई बातचीत नहीं हुई है। यानी केजरीवाल ने इस मामले में किसी भी तरह के सीधे राजनीतिक कनेक्शन से दूरी बनाने की कोशिश की। लेकिन राजनीति में सवाल सिर्फ यह नहीं होता कि नेता क्या कह रहा है, सवाल यह भी होता है कि उसके बयान का राजनीतिक मतलब क्या निकल रहा है। और फिलहाल यही सबसे बड़ी बहस बन चुकी है।

केजरीवाल ने CJP आंदोलन की तारीफ करते हुए कहा कि इस आंदोलन ने बहुत बड़ा काम किया है। उनके मुताबिक इस आंदोलन ने देश के लोगों के अंदर का डर खत्म किया है। उन्होंने कहा कि आज आप देख सकते हैं कि कुछ बच्चों को किस तरह डराया जा रहा है। लेकिन अगर एक बच्चे को डराया जाता है, तो उसके बाद दस और बच्चे सामने आ जाते हैं। यानी केजरीवाल के मुताबिक आंदोलन की सबसे बड़ी उपलब्धि सिर्फ कोई इस्तीफा नहीं था, बल्कि लोगों में विरोध करने का साहस पैदा करना था। और यहीं से यह पूरा मामला सिर्फ एक राजनीतिक आंदोलन नहीं, बल्कि डर बनाम विरोध की बहस में बदलता हुआ दिखाई देता है।

अब इस पूरे मामले में तीन सवाल सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं। पहला, क्या CJP आंदोलन सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के लिए था? दूसरा, क्या इस आंदोलन के पीछे किसी राजनीतिक दल की भूमिका थी? और तीसरा, क्या केजरीवाल का “मोदी जी को ठोकने आए थे” वाला बयान आने वाले दिनों में बीजेपी और AAP के बीच एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने वाला है? क्योंकि एक बात तो साफ है, इस्तीफा हो चुका है, लेकिन विवाद अभी खत्म नहीं हुआ। बल्कि केजरीवाल के इस बयान के बाद सियासत की दूसरी पारी शुरू होती दिखाई दे रही है। अब देखना होगा कि बीजेपी इस बयान को कितनी दूर तक लेकर जाती है और आम आदमी पार्टी इसका जवाब किस अंदाज में देती है। क्योंकि राजनीति में कई बार इस्तीफा कहानी का अंत नहीं होता, बल्कि एक नए राजनीतिक विवाद की शुरुआत होता है।

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