दुनिया की राजनीति एक बार फिर उथल-पुथल के दौर में पहुंचती नजर आ रही है। अमेरिका पर BRICS जैसे बहुपक्षीय संगठनों को कमजोर करने की रणनीति अपनाने के आरोप लग रहे हैं। हालिया घटनाक्रम में वेनेजुएला को लेकर बड़ा दावा किया गया है कि 3 जनवरी 2026 को अमेरिका ने वहां सैन्य कार्रवाई कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार किया। इसके बाद पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए कि अमेरिका वहां नई सरकार बनने तक नियंत्रण बनाए रखेगा।
वेनेजुएला के बाद ट्रंप के बयानों से साफ होता है कि अमेरिका की नजर अब पांच और देशों पर है—कोलंबिया, क्यूबा, ग्रीनलैंड, ईरान और मेक्सिको। कोलंबिया को लेकर ट्रंप ने तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया, वहीं क्यूबा की सरकार को अस्थिर बताया गया। ग्रीनलैंड को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए उस पर अमेरिकी दावे को दोहराया गया, जबकि ईरान को लेकर सख्त चेतावनी दी गई है।
मेक्सिको पर ड्रग्स तस्करी को लेकर दबाव बनाया गया है और अमेरिकी सेना की मदद की पेशकश का जिक्र भी सामने आया है। इन सभी संकेतों को अमेरिका की आक्रामक विदेश नीति के रूप में देखा जा रहा है, जो 19वीं सदी के मुनरो सिद्धांत की याद दिलाती है।
वेनेजुएला मामले पर BRICS देशों की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। ब्राजील ने इसे खतरनाक मिसाल बताया, रूस और चीन ने अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन की बात कही, जबकि भारत ने चिंता जताते हुए बातचीत से समाधान की अपील की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका इन क्षेत्रों में प्रभाव बढ़ाने में सफल होता है, तो BRICS की सामूहिक ताकत को झटका लग सकता है। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि दुनिया की शक्ति संतुलन किस दिशा में आगे बढ़ता है।



