चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपनएआई से जुड़ी एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते खतरों को देखते हुए ओपनएआई ने एक नई और बेहद अहम पोस्ट के लिए हायरिंग शुरू कर दी है। इस पद का नाम है “हेड ऑफ प्रिपेयर्डनेस”।
इस वैकेंसी की जानकारी खुद ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह नौकरी बेहद तनावपूर्ण होगी, लेकिन भविष्य के लिए बेहद जरूरी भी है। ऑल्टमैन के मुताबिक, AI मॉडल्स की तेजी से हो रही तरक्की कई असली और गंभीर चुनौतियां पैदा कर रही है।
सैम ऑल्टमैन ने अपने पोस्ट में खासतौर पर मेंटल हेल्थ पर पड़ने वाले प्रभाव और AI-पावर्ड साइबर हथियारों के खतरे का जिक्र किया। उनका कहना है कि अगर AI को समय रहते कंट्रोल नहीं किया गया, तो यह गलत हाथों में पड़कर समाज और मानवता के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
हेड ऑफ प्रिपेयर्डनेस की जिम्मेदारी होगी AI की उन ताकतवर क्षमताओं पर नजर रखना, जिन्हें “फ्रंटियर कैपेबिलिटीज” कहा जाता है। ये वही क्षमताएं हैं जो भविष्य में गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं। इस पद पर काम करने वाले अधिकारी को ऐसे थ्रेट मॉडल्स तैयार करने होंगे, जिससे यह पहले ही पता लगाया जा सके कि AI कब और कैसे खतरनाक रूप ले सकता है।
इसके अलावा इस रोल में एक मजबूत और स्केलेबल सेफ्टी सिस्टम बनाना, AI से होने वाले साइबर हमलों से निपटने की तैयारी करना और लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर AI के असर को मॉनिटर करना भी शामिल है।
गौर करने वाली बात यह है कि हाल के वर्षों में AI चैटबॉट्स को टीनएजर्स के सुसाइड केस, डेल्यूशंस और AI साइकोसिस जैसी समस्याओं से जोड़ा गया है। इसी वजह से ओपनएआई अब सेफ्टी पर पहले से कहीं ज्यादा फोकस कर रही है।
2015 में शुरू हुई ओपनएआई आज 80 बिलियन डॉलर से ज्यादा की वैल्यूएशन तक पहुंच चुकी है। लेकिन तेज ग्रोथ के साथ खतरे भी बढ़े हैं। ऐसे में यह नई नियुक्ति सुरक्षित और जिम्मेदार AI की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।



