क्रिकेट के इतिहास में कई ऐसे रिकॉर्ड बने हैं, जिन्होंने खेल को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया, लेकिन कुछ रिकॉर्ड ऐसे भी हैं जिनका टूटना आज के दौर में लगभग नामुमकिन माना जाता है। बदलते फॉर्मेट, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और खिलाड़ियों के सीमित करियर के बीच ये रिकॉर्ड आज भी क्रिकेट प्रेमियों को हैरान करते हैं।
सबसे पहले बात करते हैं महान बल्लेबाज़ सचिन तेंदुलकर की, जिन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट में कुल 100 शतक लगाए। टेस्ट और वनडे दोनों फॉर्मेट में लगातार प्रदर्शन करते हुए यह मुकाम हासिल करना आज के किसी भी खिलाड़ी के लिए बेहद मुश्किल चुनौती है। वहीं, सर डॉन ब्रैडमैन का टेस्ट औसत 99.94 आज भी बल्लेबाज़ी का सबसे ऊँचा मानक माना जाता है।
टेस्ट क्रिकेट में सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी का रिकॉर्ड ब्रायन लारा के नाम है, जिन्होंने नाबाद 400 रन बनाकर इतिहास रच दिया। इस रिकॉर्ड को तोड़ना मौजूदा क्रिकेट में लगभग असंभव नजर आता है। वनडे क्रिकेट में भारत के रोहित शर्मा ने 264 रन की ऐतिहासिक पारी खेली, जो आज भी इस फॉर्मेट का सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर है।
गेंदबाज़ी की बात करें तो श्रीलंका के मुथैया मुरलीधरन ने टेस्ट क्रिकेट में 800 विकेट लेकर ऐसा रिकॉर्ड बनाया, जिसे छू पाना भी किसी गेंदबाज़ के लिए सपना बन गया है। वहीं इंग्लैंड के जिम लेकर ने एक ही टेस्ट मैच में 19 विकेट लेकर इतिहास में अपना नाम अमर कर लिया।
इसके अलावा राहुल द्रविड़ का टेस्ट क्रिकेट में कभी गोल्डन डक पर आउट न होना, जेसन गिलेस्पी का नाइटवॉचमैन रहते हुए दोहरा शतक और हेडली वेरिटी का एक पारी में 10 विकेट लेना भी ऐसे रिकॉर्ड हैं, जो शायद आने वाली पीढ़ियाँ केवल किताबों में ही पढ़ेंगी।
कुल मिलाकर, ये महारिकॉर्ड न सिर्फ क्रिकेट के गौरवशाली इतिहास को दर्शाते हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि कुछ उपलब्धियाँ समय के साथ और भी महान बन जाती हैं।



