देश में इन दिनों एक बड़ी और संवेदनशील चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। सवाल उठ रहा है कि क्या भारतीय करेंसी नोटों से महात्मा गांधी की तस्वीर हटाई जा सकती है? यह बहस तब तेज हुई जब राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने दावा किया कि केंद्र सरकार भारतीय नोटों के डिज़ाइन में बदलाव पर विचार कर रही है और भविष्य में गांधी जी की तस्वीर की जगह किसी अन्य प्रतीक या चित्र को शामिल किया जा सकता है। इस बयान के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता तक में हलचल मच गई।
महात्मा गांधी की तस्वीर पिछले कई दशकों से भारतीय नोटों की पहचान बनी हुई है। वर्ष 1969 में गांधी जी के 100वें जन्मदिवस के अवसर पर पहली बार भारतीय मुद्रा पर उनकी तस्वीर छापी गई थी। तब से लेकर आज तक लगभग सभी नोटों पर गांधी जी का चित्र मौजूद है, जो सत्य, अहिंसा और राष्ट्रपिता के आदर्शों का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में उनकी तस्वीर हटाने की खबर लोगों की भावनाओं से जुड़ गई है।
हालांकि इस पूरे मामले पर भारतीय रिज़र्व बैंक और सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। आरबीआई पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि नोटों के डिज़ाइन में बदलाव एक लंबी और संवैधानिक प्रक्रिया होती है, जिसे बिना ठोस निर्णय और अनुमति के नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों का कहना है कि नोटों पर किसी भी तस्वीर को बदलने के लिए सरकार और आरबीआई दोनों की सहमति जरूरी होती है।
वहीं दूसरी ओर, कुछ लोग यह तर्क दे रहे हैं कि भारतीय मुद्रा पर अन्य महान व्यक्तित्वों या सांस्कृतिक प्रतीकों को भी स्थान मिलना चाहिए, ताकि भारत की विविध विरासत को दर्शाया जा सके। लेकिन बड़ी संख्या में लोग मानते हैं कि महात्मा गांधी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि भारत की आत्मा हैं, और उनकी तस्वीर हटाना देश की पहचान से छेड़छाड़ जैसा होगा।
फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक बयानबाज़ी और चर्चाओं तक सीमित है। सच्चाई क्या है और भविष्य में भारतीय नोटों का स्वरूप बदलेगा या नहीं, इसका जवाब आने वाला समय ही देगा।



