दोस्तों, बिहार की राजनीति में हुआ बड़ा झटका! कांग्रेस के दिग्गज नेता शकील अहमद ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया! हाँ, आपने सही सुना, बिहार चुनावों के बीच ही यह ऐतिहासिक फैसला सामने आया है।
शकील अहमद सिर्फ किसी नेता नहीं हैं। ये वही नेता हैं, जो बिहार में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष, विधायक और सांसद रह चुके हैं। बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री और भारत सरकार में केंद्रीय मंत्री का अनुभव भी इनके पास है। लेकिन पिछले कुछ चुनावों में टिकट न मिलने से वे नाराज थे, और अब उन्होंने अपने 16 अप्रैल, 2023 के पत्र का हवाला देते हुए साफ कर दिया कि वे भविष्य में कभी भी चुनाव नहीं लड़ेंगे।
दिलचस्प बात यह है कि शकील अहमद ने इस्तीफा देते हुए यह भी बताया कि उनके तीनों पुत्र कनाडा में रहते हैं और उनमें से किसी को भी राजनीति में कोई रुचि नहीं है। यानी कांग्रेस की अगली पीढ़ी अब राजनीतिक मैदान में नहीं उतरेगी। लेकिन यहां एक बड़ा ट्विस्ट है – उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी दूसरी पार्टी में शामिल नहीं होंगे। उनका विश्वास कांग्रेस की नीतियों और सिद्धांतों में अब भी अटूट है।
उन्होंने कहा, “बहुत ही दुखी मन से मैंने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा देने का फैसला लिया है। मेरा यह फैसला सिर्फ वर्तमान पार्टी नेतृत्व से मतभेद के कारण है, न कि कांग्रेस की नीतियों से। मैं जीवन भर कांग्रेस का शुभचिंतक और समर्थक रहूंगा और मेरा अंतिम वोट भी कांग्रेस के पक्ष में ही गिरेगा।”
शकील अहमद का राजनीतिक परिवार भी काबिले तारीफ है। उनके दादा स्व. अहमद गफूर 1937 में कांग्रेस विधायक बने थे, उनके पिता शकूर अहमद पाँच बार विधायक रहे और खुद शकील अहमद भी पांच बार विधायक और सांसद चुने जा चुके हैं। राजनीति उनके खून में है, लेकिन इस बार उन्होंने पार्टी छोड़ने का ऐतिहासिक कदम उठाया।
और सबसे बड़ी बात – उन्होंने इस्तीफा इस बार मतदान समाप्त होने के बाद दिया, ताकि पार्टी को नुकसान न हो। लेकिन सवाल अब भी वही है – क्या बिहार में कांग्रेस इस झटके से संभल पाएगी? या शकील अहमद का यह कदम गठबंधन की राजनीति में नई हलचल मचा देगा?



