भारत पर 100% टैरिफ लगा सकेंगे ट्रम्प, रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर एक्शन का अधिकार मिला, अमेरिकी संसद में बिल पास
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के लिए भारत पर 100% तक टैरिफ लगाने का रास्ता साफ हो गया है। अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने बुधवार को रूस से ज्यादा तेल खरीदने वाले 5 देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने वाला बिल पास किया।
बिल के पक्ष में 262 और विरोध में 159 वोट पड़े। बिल अब व्हाइट हाउस जाएगा। ट्रम्प के साइन करते ही यह कानून बन जाएगा। इसे आधिकारिक तौर पर लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 नाम दिया गया है।
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव ने मंगलवार को 214-211 वोट से बिल को अंतिम वोटिंग के लिए आगे बढ़ाया था। अमेरिकी सीनेट अगस्त में इसे 86-11 वोट से पास कर चुकी है।
रूस से ज्यादा कच्चा तेल खरीदने वाले 5 देशों की अमेरिकी लिस्ट में चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि हर 180 दिन में इस लिस्ट का आकलन करेंगे।

यह बिल कानून बना तो भारत पर असर
पहली स्थिति: भारत रूस से तेल खरीदता रहे
अमेरिका के 100% टैरिफ का सीधा असर भारत के निर्यात बिल पर पड़ सकता है। इससे भारतीय सामान अमेरिका में महंगा हो जाएगा। अमेरिकी खरीदार सस्ता विकल्प ढूंढेंगे, जैसे बांग्लादेश, वियतनाम, मैक्सिको, चीन। नतीजतन भारत के टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी, इंजीनियरिंग गुड्स, लेदर, समुद्री उत्पाद, केमिकल्स समेत कई चीजों के ऑर्डर घट जाएंगे।
दूसरी स्थिति: भारत रूस को छोड़कर दूसरे देशों से तेल खरीदे तो…
रूस से आने वाले तेल पर प्रतिबंध या टैरिफ का दबाव बढ़ता है तो भारत को दूसरे देशों से तेल खरीदना पड़ेगा। यह महंगा पड़ सकता है, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है।

रूस के रक्षा क्षेत्रों पर भी प्रतिबंध लगेगा
बिल का नाम ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ है। इस बिल में रूस के तेल और रक्षा से जुड़े कारोबार पर कड़े प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है।
साथ ही रूस के उन टैंकरों पर भी कार्रवाई हो सकती है, जो मौजूदा प्रतिबंधों से बचते हुए दूसरे देशों तक रूसी तेल पहुंचाते हैं। इन टैंकरों के नेटवर्क को रूस का ‘शैडो फ्लीट’ कहा जाता है।
अमेरिका पहले भी रूस पर ऐसे प्रतिबंध लगाने की कोशिश कर चुका है। लेकिन ईरान युद्ध के दौरान होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से तेल की सप्लाई पर असर पड़ा और दुनिया में तेल की कमी का डर बढ़ गया। इसके बाद अमेरिकी सरकार को रूस के तेल की बिक्री पर कुछ समय के लिए लगी पाबंदियों में छूट देनी पड़ी थी।
ईरान के साथ ट्रेड करने वाली कंपनियों पर प्रतिबंध बढ़ेगा
बिल के कानून बनने के बाद 1996 का ‘ईरान प्रतिबंध कानून’ भी 2031 तक बढ़ जाएगा। यह कानून उन गैर-अमेरिकी कंपनियों पर पाबंदी लगाता है, जो ईरान के साथ व्यापार करती हैं। यह कानून इसी साल खत्म होने वाला था।
इस बिल से अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार भी मिलेगा कि वे अमेरिका में आने वाले रूसी सामान पर 500% तक टैरिफ लगा सकें। राष्ट्रपति का यह अधिकार 5 साल तक लागू रहेगा।
यूरोपीय देशों को टैरिफ में राहत देगा अमेरिका
रूस से प्राकृतिक गैस खरीदने वाले चीन, फ्रांस, जापान, हंगरी और बेल्जियम को भी इसके दायरे में रखा गया है। हालांकि, जो देश रूस की कुल गैस निर्यात का 15% से कम आयात करते हैं और अपनी निर्भरता घटाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं, उन्हें छूट मिल सकती है।
सीनेट में पेश बिल के तहत 15 यूरोपीय देशों को प्रस्तावित 100% टैरिफ से छूट दी गई है। इन देशों को राहत इसलिए दी गई है, क्योंकि ये रूस से 15% से कम प्राकृतिक गैस खरीदते हैं और धीरे-धीरे उस पर अपनी निर्भरता भी कम कर रहे हैं।
डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि यह बिल यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ नहीं है। इसका निशाना सिर्फ वे देश हैं, जो अब भी रूस के तेल कारोबार को सबसे ज्यादा आर्थिक सहारा दे रहे हैं।
बिल में रूस के ऊर्जा उद्योग, वित्तीय संस्थानों, रक्षा औद्योगिक ढांचे, कारोबारियों और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तक पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है।



