Sonam Wangchuk ka bada alan 19 september se phir aandolan sarkar ke samne khadi hui nai chunauti

सोनम वांगचुक का बड़ा ऐलान! 19 सितंबर से फिर आंदोलन, सरकार के सामने खड़ी हुई नई चुनौती

लद्दाख पर फिर आर-पार… सोनम वांगचुक का बड़ा ऐलान, तय कर दी आंदोलन की तारीख… जी हाँ, लद्दाख से दिल्ली तक एक बार फिर हलचल तेज होने वाली है! जिस सोनम वांगचुक को आपने जंतर-मंतर पर आंदोलन करते देखा था, वही सोनम वांगचुक अब एक बार फिर आंदोलन के मैदान में उतरने की तैयारी कर चुके हैं। तारीख भी बता दी है—19 सितंबर से 24 सितंबर! लेकिन सवाल ये है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि बातचीत की टेबल से मामला फिर आंदोलन की सड़क तक पहुंच गया? क्या सरकार से बातचीत बेनतीजा रही? क्या लद्दाख की मांगों पर अब तक कोई ठोस फैसला नहीं हुआ? और क्या सितंबर में दिल्ली एक बार फिर बड़े प्रदर्शन का गवाह बनने वाली है? कहानी में ट्विस्ट यहीं है… क्योंकि जिस बैठक से समाधान की उम्मीद थी, उसी बैठक के बाद सोनम वांगचुक ने आंदोलन का ऐलान कर दिया!

दरअसल, लद्दाख से जुड़े प्रतिनिधियों और गृह मंत्रालय की सब-कमेटी के बीच बातचीत हुई थी। उम्मीद थी कि इस बैठक में लद्दाख के लिए प्रस्तावित चुनी हुई UT-लेवल बॉडी को लेकर कोई ठोस ड्राफ्ट सामने आएगा। लेकिन वांगचुक का कहना है कि ऐसा नहीं हुआ। ड्राफ्ट नहीं आया, ठोस प्रगति नहीं दिखी और इसके बजाय अगली बैठक के लिए सवालों की एक लिस्ट सामने रख दी गई। अब जरा सोचिए… चार महीने से बातचीत का इंतजार, लद्दाख से प्रतिनिधिमंडल दिल्ली पहुंचता है, उम्मीद होती है कि इस बार कोई बड़ा प्रस्ताव सामने आएगा, लेकिन बैठक खत्म होती है और सामने आता है—सवालों का एक और सेट! यही वजह है कि सोनम वांगचुक ने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर कर दी।

वांगचुक ने कहा कि लोगों को इस बैठक से बहुत उम्मीदें थीं, क्योंकि पिछली बैठक को करीब चार महीने बीत चुके थे। गृह मंत्रालय के पास भी पर्याप्त समय था। लेकिन इसके बावजूद ड्राफ्ट सामने नहीं आया। और अब यहीं से कहानी का अगला अध्याय शुरू होता है। वांगचुक ने ऐलान कर दिया कि अगर लद्दाख से जुड़े मुद्दों पर सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाया, तो 19 सितंबर से 24 सितंबर तक नया आंदोलन होगा। यानी संदेश बिल्कुल साफ है—बातचीत हुई है, लेकिन समाधान अभी बाकी है। और यही बात इस पूरे मामले को फिर से गर्म कर रही है।

लेकिन सोनम वांगचुक और लद्दाख आंदोलन की कहानी सिर्फ आज के ऐलान तक सीमित नहीं है। पिछले साल भी लद्दाख को लेकर बड़ा आंदोलन हुआ था। सितंबर में विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई थी। चार लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। इसके बाद सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA के तहत हिरासत में लिया गया था। उन्हें जोधपुर जेल में करीब छह महीने बिताने पड़े। उस समय सरकार की ओर से उन पर झड़पों को भड़काने का आरोप लगाया गया था। लेकिन जेल से बाहर आने के बाद भी वांगचुक पीछे नहीं हटे।

मार्च में रिहाई हुई और इसके बाद फिर आंदोलन का सिलसिला शुरू हो गया। जून में वे छात्रों के आंदोलन के समर्थन में जंतर-मंतर पहुंचे और 28 जून से भूख हड़ताल पर बैठ गए। भूख हड़ताल चली, 26 दिन तक चली, मामला गरमाया और फिर जेपी नड्डा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मिलने पहुंचा। उनकी भूख हड़ताल अस्पताल में खत्म कराई गई। लेकिन अब एक बार फिर सोनम वांगचुक ने आंदोलन की तारीख घोषित कर दी है और इस बार मुद्दा सीधे लद्दाख की राजनीतिक मांगों से जुड़ा है।

लद्दाख के प्रतिनिधि लंबे समय से राजनीतिक अधिकार, स्थानीय प्रतिनिधित्व और ज्यादा स्वायत्तता जैसे मुद्दे उठा रहे हैं। लेह एपेक्स बॉडी यानी LAB और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस यानी KDA भी इस प्रक्रिया में सरकार के साथ बातचीत कर रहे हैं। लेकिन सवाल वही है—क्या बातचीत आगे बढ़ रही है? सोनम वांगचुक का जवाब फिलहाल—निराशा! और अब इसी निराशा ने आंदोलन की नई तारीख सामने ला दी है।

19 सितंबर… फिर 20, 21, 22, 23 और 24 सितंबर! ये तारीखें अब बेहद महत्वपूर्ण होने वाली हैं। क्या सरकार इससे पहले कोई बड़ा फैसला लेगी? क्या अगली बैठक में लद्दाख के लिए प्रस्तावित बॉडी का ड्राफ्ट सामने आएगा? क्या सरकार और आंदोलनकारियों के बीच कोई सहमति बन पाएगी? या फिर दिल्ली की सड़कों पर एक बार फिर आंदोलन की आवाज सुनाई देगी? सबसे बड़ा सवाल—क्या सितंबर का ये आंदोलन सिर्फ चेतावनी है या किसी बड़े टकराव की शुरुआत?

फिलहाल सोनम वांगचुक ने अपनी तरफ से गेंद सरकार के पाले में डाल दी है। सरकार से उम्मीद है कि लद्दाख के मुद्दों पर ठोस प्रगति होगी, जबकि वांगचुक का कहना है कि अगर मांगों पर बात आगे नहीं बढ़ी, तो आंदोलन होगा। और इसलिए आने वाले दिन बेहद अहम हैं। क्योंकि मामला सिर्फ एक प्रदर्शन की तारीख का नहीं है। मामला ये है कि लद्दाख की मांगों पर सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत समाधान तक पहुंचती है या फिर एक बार फिर आंदोलन का रास्ता खुलता है।

19 सितंबर दूर नहीं है… और उससे पहले अगर कोई बड़ा फैसला नहीं आया, तो जंतर-मंतर एक बार फिर सुर्खियों में हो सकता है। अब देखना यही है—सरकार बातचीत से रास्ता निकालती है या सोनम वांगचुक आंदोलन का बिगुल बजाते हैं? फिलहाल इतना जरूर समझ लीजिए—लद्दाख में हलचल फिर तेज है, दिल्ली पर नजरें टिक गई हैं और 19 सितंबर की तारीख अब बेहद महत्वपूर्ण हो चुकी है!

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