Venezuela par US Attack bharat ke liye bumper fayda barsega arbo ka paisa

वेनेजुएला पर US अटैक, भारत के लिए बंपर फायदा, बरसेगा अरबों का पैसा

अमेरिका द्वारा वेनेजुएला में किए गए सैन्य और राजनीतिक हस्तक्षेप ने वैश्विक राजनीति के साथ-साथ ऊर्जा बाजार में भी हलचल पैदा कर दी है। देर रात हुई कार्रवाई में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी के बाद संकेत मिल रहे हैं कि फिलहाल देश की बागडोर अमेरिका के प्रभाव में रहेगी। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार सबसे बड़ी वजह हैं, जो दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडारों में गिने जाते हैं।

इस बदलाव का सीधा फायदा भारत को मिल सकता है। जानकारों के अनुसार, यदि अमेरिका के नियंत्रण में आने के बाद वेनेजुएला पर लगे कड़े प्रतिबंधों में ढील दी जाती है, तो भारत के लंबे समय से फंसे करीब एक अरब अमेरिकी डॉलर के बकाये की वसूली संभव हो सकती है। खास तौर पर ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (ओवीएल) की स्थिति मजबूत हो सकती है, जिसकी वेनेजुएला के सैन क्रिस्टोबल तेल क्षेत्र में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी है। प्रतिबंधों के कारण इस परियोजना से जुड़े करोड़ों डॉलर के लाभांश का भुगतान वर्षों से अटका हुआ है।

फिलहाल वहां कच्चे तेल का उत्पादन बेहद कम होकर 5,000 से 10,000 बैरल प्रतिदिन रह गया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक और अतिरिक्त रिग्स के इस्तेमाल से इसे 80,000 से 1,00,000 बैरल प्रतिदिन तक बढ़ाया जा सकता है। ओएनजीसी के पास इसके लिए आवश्यक उपकरण पहले से मौजूद हैं।

यदि वेनेजुएला का तेल दोबारा वैश्विक बाजार में लौटता है, तो इसका लाभ भारतीय रिफाइनरियों को भी मिलेगा। रिलायंस, नयारा, इंडियन ऑयल और एचपीसीएल-मित्तल जैसी कंपनियां भारी कच्चे तेल को प्रोसेस करने में सक्षम हैं। इससे न सिर्फ भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतों में स्थिरता आने से आयातक देशों को बड़ा आर्थिक फायदा मिल सकता है।

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