बैंक कर्मचारियों की उड़ी नींद! AI से 2030 तक 2 लाख नौकरियां खत्म होने का खतरा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI जहां एक ओर काम को तेज, सस्ता और सटीक बना रहा है, वहीं दूसरी ओर नौकरियों पर संकट भी गहराता जा रहा है। अब तक टेक सेक्टर में असर दिखाने वाला AI, तेजी से बैंकिंग सेक्टर में भी अपनी जगह बना रहा है, जिससे लाखों कर्मचारियों की चिंता बढ़ गई है।
बैंकिंग सेक्टर को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगले चार से पांच सालों में अकेले यूरोप में 2 लाख से ज्यादा बैंकिंग नौकरियां खत्म हो सकती हैं। डिजिटल बैंकिंग, ऑटोमेशन और ब्रांचों की संख्या में कटौती को इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है। इससे आने वाले समय में बैंकिंग इंडस्ट्री का पूरा स्वरूप बदल सकता है।
मॉर्गन स्टेनली के विश्लेषण के अनुसार, यूरोप के 35 बड़े बैंक अगले पांच वर्षों में अपने कुल वर्कफोर्स का करीब 10 प्रतिशत तक कम कर सकते हैं। बताया गया है कि यूरोप के बैंकों में लगभग 21 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें से करीब 2.12 लाख पद सीधे खतरे में हैं।
सबसे ज्यादा असर बैक-ऑफिस ऑपरेशंस, डेटा एंट्री, प्रोसेसिंग, रिस्क मैनेजमेंट और कंप्लायंस जैसे विभागों पर पड़ने की आशंका है। ये सभी काम डेटा आधारित और बार-बार दोहराए जाने वाले होते हैं, जिन्हें AI इंसानों की तुलना में कहीं अधिक तेजी और सटीकता से कर सकता है।
कई बड़े बैंक पहले ही इसकी तैयारी में जुट गए हैं। डच बैंक ABN Amro साल 2028 तक अपने 20 प्रतिशत स्टाफ में कटौती की योजना बना रहा है। वहीं Societe Generale हर विभाग की समीक्षा कर रहा है। Goldman Sachs भी AI के चलते नियुक्तियों पर रोक और छंटनी के संकेत दे चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव सिर्फ यूरोप तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में दुनिया भर के बैंकिंग सेक्टर पर AI का बड़ा असर देखने को मिलेगा।



