नए साल की शुरुआत के साथ ही मोदी सरकार ने एक बड़ा और रणनीतिक ऐलान किया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन जल्द ही गुवाहाटी और कोलकाता के बीच चलाई जाएगी। यह ट्रेन पूर्वोत्तर और पश्चिम बंगाल के बीच रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी और यात्रा को तेज़, सुरक्षित व आरामदायक बनाएगी। लेकिन इस घोषणा के पीछे केवल विकास नहीं, बल्कि राजनीति की गहरी रणनीति भी छिपी हुई मानी जा रही है।
दरअसल, यह ऐलान ऐसे समय में किया गया है जब असम और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं। बीजेपी पिछले एक दशक से असम में सत्ता में है, जबकि पश्चिम बंगाल में उसने खुद को एक मज़बूत विपक्ष के रूप में स्थापित किया है। ऐसे में वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को बीजेपी का ‘मास्टरस्ट्रोक’ माना जा रहा है, जिससे पार्टी विकास के मुद्दे को चुनावी बहस के केंद्र में लाना चाहती है।
हालांकि, इस फैसले पर सवाल भी उठ रहे हैं। बिहार चुनाव से पहले दिल्ली–पटना के बीच पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन चलाने की घोषणा की गई थी, जिससे NDA को राजनीतिक फायदा मिला। लेकिन अब पहली स्लीपर वंदे भारत ट्रेन गुवाहाटी–कोलकाता रूट पर शुरू करने का ऐलान बिहार के साथ किए गए वादे से पीछे हटने जैसा प्रतीत हो रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस नई ट्रेन से बीजेपी यह संदेश देना चाहती है कि केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार होने से विकास की रफ्तार तेज़ होती है। पश्चिम बंगाल में जहां ममता बनर्जी की TMC मज़बूत स्थिति में है, वहीं असम में बीजेपी को नए मुद्दों की तलाश है। ऐसे में वंदे भारत स्लीपर ट्रेन विकास के प्रतीक के रूप में बीजेपी के लिए एक अहम चुनावी हथियार बन सकती है।



