भारत में डिजिटल खबरें और सोशल मीडिया कंटेंट अब हर किसी के लिए रोजमर्रा का हिस्सा बन चुका है। कई वेबसाइटें और न्यूज प्लेटफ़ॉर्म रोजाना लाखों लोगों तक सूचनाएँ पहुँचाते हैं, लेकिन कुछ खबरें तकनीकी या कानून के कारण अस्थायी रूप से वेब-ब्लॉक हो जाती हैं। वेब-ब्लॉकर पेज अक्सर तब दिखाई देता है जब किसी स्टोरी या वेब लिंक को उस सर्वर पर लोड नहीं होने दिया जाता है या फिर उसको इंटरनेट सेवा प्रदाताओं द्वारा ब्लॉक कर दिया जाता है।
इस तरह के ब्लॉक का कारण आमतौर पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A है, जिसके तहत सरकार सार्वजनिक सुरक्षा, विदेशी संबंधों या ordem-व्यवस्था को ध्यान में रखकर कुछ वेब पेज, सोशल मीडिया पोस्ट या लिंक को अस्थाई रूप से अवरुद्ध कर सकती है। पिछले कुछ सालों में भारत में हजारों यूआरएल और डिजिटल हैंडल्स को इसी नियम के तहत ब्लॉक किया गया है ताकि फेक खबरें, भड़काऊ सामग्री और गलत सूचना लोगों तक न पहुँच सके।
सरकार कहती है कि यह कदम डिजिटल दुनिया में विश्वास, सुरक्षा और जवाबदेही बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि ऐसे ब्लॉकेज से प्रेस की आज़ादी और अभिव्यक्ति को रोकने की कोशिश हो सकती है। इस तरह की स्थिति में पाठकों को हमेशा खबरों की पुष्टि और विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी लेने की सलाह दी जाती है ताकि सही और सटीक जानकारी मिले।



