भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, लेकिन इसके साथ एक सवाल बार-बार उठता है — भारत पर कुल कितना कर्ज है और सबसे ज्यादा उधार किस देश से लिया गया है। आज हम आपको इसी अहम मुद्दे की पूरी और साफ़ जानकारी देने जा रहे हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2025 तक भारत पर कुल विदेशी कर्ज करीब 736 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। भारतीय रुपये में देखें तो यह रकम लगभग 64 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा बैठती है। हालांकि यह आंकड़ा बड़ा जरूर लगता है, लेकिन अगर इसे भारत की जीडीपी के अनुपात में देखा जाए तो यह करीब 19 प्रतिशत के आसपास है, जिसे आर्थिक विशेषज्ञ एक सुरक्षित स्तर मानते हैं।
यह जानना भी जरूरी है कि भारत का पूरा कर्ज सरकार का नहीं होता। इसमें सरकारी कर्ज के साथ-साथ निजी कंपनियों, बैंकों और कॉर्पोरेट सेक्टर का विदेशी उधार भी शामिल होता है। कुल विदेशी कर्ज का लगभग 23 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार का है, जबकि बाकी कर्ज निजी और व्यावसायिक संस्थाओं का होता है।
अब सवाल आता है कि भारत ने सबसे ज्यादा उधार किस देश से लिया है। अगर द्विपक्षीय यानी सीधे किसी देश से लिए गए कर्ज की बात करें, तो जापान भारत का सबसे बड़ा कर्जदाता देश है। भारत ने जापान से इंफ्रास्ट्रक्चर, मेट्रो परियोजनाओं, रेलवे और विकास कार्यों के लिए सबसे ज्यादा ऋण लिया है। इसके अलावा वर्ल्ड बैंक, एशियन डेवलपमेंट बैंक और IMF जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से भी भारत ने कर्ज लिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था, बढ़ता टैक्स कलेक्शन और विशाल विदेशी मुद्रा भंडार इस कर्ज को संभालने में सक्षम है। कुल मिलाकर, भारत पर कर्ज जरूर है, लेकिन यह नियंत्रण में है और फिलहाल देश की आर्थिक स्थिरता के लिए बड़ा खतरा नहीं माना जा रहा।



