दुनिया की कूटनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। भारत के करीबी माने जाने वाले खाड़ी देश अब पाकिस्तान के साथ रिश्ते मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। सऊदी अरब के बाद अब संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई ने भी पाकिस्तान से हाथ मिला लिया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा यू-टर्न माना जा रहा है। यूएई के राष्ट्रपति की पाकिस्तान यात्रा ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं और दक्षिण एशिया की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
इस दौरे का मुख्य मकसद आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को बढ़ाना बताया जा रहा है। पाकिस्तान इस समय गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है और उसे विदेशी निवेश की सख्त जरूरत है। ऐसे में यूएई का आगे आना पाकिस्तान के लिए राहत की खबर माना जा रहा है। बातचीत में ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर, कृषि, व्यापार और निवेश जैसे अहम मुद्दे शामिल बताए जा रहे हैं। यूएई पहले से ही पाकिस्तान में रियल एस्टेट और ऊर्जा सेक्टर में निवेश कर चुका है और अब इन रिश्तों को और मजबूत करने की तैयारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक भी है। खाड़ी देश अब केवल एक देश पर निर्भर नहीं रहना चाहते और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए नई साझेदारियां कर रहे हैं। सऊदी अरब के बाद यूएई का पाकिस्तान के करीब जाना इसी नीति का हिस्सा माना जा रहा है।
भारत और यूएई के रिश्ते लंबे समय से मजबूत रहे हैं। लाखों भारतीय यूएई में रहते और काम करते हैं, और दोनों देशों के बीच व्यापार भी लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में यूएई का पाकिस्तान की ओर झुकाव भारत के लिए कूटनीतिक चुनौती बन सकता है, हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यूएई भारत से रिश्ते कमजोर नहीं करेगा।
कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम साफ संकेत देता है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में स्थायी दोस्ती नहीं बल्कि हित सबसे ऊपर होते हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यूएई का यह कदम दक्षिण एशिया की राजनीति को किस दिशा में ले जाता है।



