सरकार ने रेल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एक भारी 1.3 लाख करोड़ रुपये का मेगा प्लान तैयार किया है, ताकि भारत में रेल हादसों में कोई भी जान न जाए। यह घोषणात्मक कदम वित्त वर्ष 2027 के लिए प्रस्तावित है, जिसमें रेलवे का लगभग आधा कैपेक्स यानी पूंजीगत व्यय सुरक्षा कार्यों पर केंद्रित किया जाएगा। इस साल कुल कैपेक्स लगभग 2.76 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ने का अनुमान है, जिसमें से सुरक्षा प्रोजेक्ट्स को विशेष महत्व मिलेगा।
पिछले कुछ वर्षों में दुर्घटनाओं की दर में काफी गिरावट आई है, लेकिन हाल की घटनाओं ने फिर से चिंता को जन्म दिया है। इसी के मद्देनजर सरकार ने नेशनल रेल सेफ्टी फंड का विस्तार किया है, जिसमें पहले ही महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरणों एवं अपग्रेडेशन पर 1.08 ट्रिलियन रुपये से अधिक खर्च हो चुका है। इससे रेलवे की सुरक्षा प्रणाली को और अधिक मज़बूती मिलेगी।
इस मेगा प्लान के तहत कवच सिस्टम, पटरियों का नवीनीकरण, आधुनिक तकनीक से लैस रेल पहियों का निर्माण और ट्रेनिंग पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल पैसा खर्च करने से सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो सकती; इसके लिए उचित रख-रखाव, ट्रेनिंग, जवाबदेही और सुरक्षा प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन भी जरूरी है।
रेल सुरक्षा पर होने वाला खर्च हर साल बढ़ रहा है। उदाहरण के लिए पिछले दशक में यह राशि कई गुना बढ़ी है। इसका उद्देश्य यही है कि भविष्य में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो और हादसों की वजह से किसी की जान न जाए। सरकार की यह पहल यात्रियों के लिए भरोसेमंद, सुरक्षित और आधुनिक रेलवे नेटवर्क बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।



