दिल्ली के रामलीला मैदान से उठा एक नारा… और देश की राजनीति में मच गया तूफान! “मोदी तेरी कब्र खुदेगी” — ये शब्द नहीं, बल्कि वो चिंगारी है जिसने सत्ता और विपक्ष के बीच आग भड़का दी है। सवाल ये नहीं कि नारा किसने लगाया, सवाल ये है कि क्या भारतीय राजनीति इस स्तर तक गिर चुकी है?
कांग्रेस की ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ रैली में जैसे ही ये नारे गूंजे, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो गए। बीजेपी ने इसे सीधा-सीधा प्रधानमंत्री की मौत की कामना बताया और पलटवार ऐसा कि बयान नहीं, सियासी हमला बन गया। बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी बोले— कांग्रेस का असली चरित्र सामने आ गया है, जो खुद कब्र खोदने की बात कर रही है, वो खुद दफन होने वाली है।
यहीं से कहानी ने लिया इतिहास का मोड़। मुगलों की मिसाल, औरंगजेब का ज़िक्र और नेहरू परिवार की छठी पीढ़ी तक तुलना— संदेश साफ था, सत्ता की राजनीति अब वंश और विरासत पर आकर टिक गई है। दावा ये कि जैसे औरंगजेब के बाद मुगल साम्राज्य ढह गया, वैसे ही राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस का भविष्य अंधकारमय है।
उधर कांग्रेस भी हमलावर है। जयपुर की नेता मंजू लता मीणा ने कहा— ये नारा जनता के गुस्से की आवाज़ है, वोट चोरी के खिलाफ चेतावनी है। राहुल गांधी ने मंच से सीधा आरोप लगाया— चुनाव आयोग बीजेपी की “B टीम” बन चुका है, कानून बदले गए हैं और जवाबदेही तय होगी।
खड़गे का भावुक बयान, प्रियंका का तीखा हमला और राहुल का आत्मविश्वास— रैली सिर्फ भीड़ नहीं थी, सियासी शक्ति प्रदर्शन थी। लेकिन असली सवाल अब भी हवा में है की ये नारे सत्ता बदलेंगे या सियासत की मर्यादा? चुनाव नजदीक हैं, बयान ज़हरीले हैं, और फैसला अब जनता के हाथ में है— लोकतंत्र बोलेगा, कौन टिकेगा!



