सोचिए — वो पवित्र दुपट्टा, जिसे श्रद्धालुओं को दे कर आस्था का सम्मान कहा जाता था, असल में सिर्फ सस्ते पॉलिस्टर का दामन निकला! हाँ — आपने सही सुना! 10 साल तक चलता रहा Tirumala Tirupati Devasthanams (TTD) धोखा — और करोड़ों रूपए का ‘रेशमी दुपट्टा’ घोटाला अभी उजागर हुआ है!
2015 से 2025 तक — एक ही फर्म ने लाखों दुपट्टे सप्लाई किए, हर बार 100% मलबेरी सिल्क का दावा किया गया। लेकिन जांच की रिपोर्ट में हुआ खुलासा — वो दुपट्टे असल में पॉलिस्टर के निकले! नमूने भेजे गए थे Central Silk Board समेत दो प्रयोगशालाओं में — और दोनों ने कन्फर्म किया कि दुपट्टा रेशम नहीं, पॉलिस्टर है।
₹54 करोड़+ का घोटाला! दस सालों का विश्वासघात! भक्तों की श्रद्धा से खेल! ‘शुद्ध रेशम’ कहकर बेची गई सस्ती पॉलिस्टर! — ये सब एक साथ! जब TTD के चेयरमैन B. R. Naidu ने विजिलेंस टीम को भेजा, तभी हुआ सच का पर्दाफाश। पुराने टेंडर रद्द, आपूर्ति रोक दी गई — और मामला अब ACB की जांच में!
और यह पहला मामला नहीं — पहले ही नकली घी वाले लड्डू विवाद की सुर्खियाँ रही, दान पेटी चोरी, रिश्वत और अवैध पैरों की आपूर्ति… सब मिलकर बना चुके हैं यह मंदिर ट्रस्ट को सवालों की आग में! यानी वो पवित्र दुपट्टा, जिसको आपने श्रद्धा से छुआ, चढ़ाया — दरअसल था सिर्फ दिखावा! 54 करोड़ का धोखा, 10 सालों का विश्वासघात… धर्म के नाम पर सस्ती पॉलिस्टर बिकने वाला घोटाला! अगर आस्था है — तो सवाल भी उठना चाहिए!
अगर आप चाहते हैं कि आपकी आस्था सुरक्षित रहे — तो इस घोटाले की सच्चाई सबके सामने क़रार होनी चाहिए। शेयर करें, सुनें, पूछें — क्योंकि धर्म और विश्वास का आधार सिर्फ दिखावा नहीं, सच्चाई होनी चाहिए!



