चांदी की कीमतों ने निवेशकों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। 2 लाख रुपये प्रति किलो पार कर चुकी चांदी ने पिछले कुछ समय में लगातार तेजी दिखाई। इसके बावजूद, एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस तेजी के बाद चांदी में बड़ी गिरावट का खतरा बना हुआ है।
सोमवार को इंटरनेशनल मार्केट में चांदी $82.670 प्रति औंस के रिकॉर्ड हाई तक पहुंची, लेकिन COMEX में यह $71.300 प्रति औंस पर बंद हुई। शुक्रवार के मुकाबले यह 13.75% यानी $11.37 प्रति औंस की गिरावट है। 2025 में बढ़ती डिमांड और सप्लाई की कमी के कारण चांदी लगभग 180% तक महंगी हुई थी।
चीन और अमेरिका के बीच चल रही आर्थिक टकराहट भी कीमतों पर असर डाल रही है। अमेरिका चाहता है कि मेटल की कीमतें नियंत्रण में रहें, जबकि चीन उन्हें बढ़ाकर डॉलर की वैल्यू को कम करना चाहता है। इसके अलावा, अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव और चीन का एक्सपोर्ट पर अप्रत्यक्ष बैन भी चांदी की कीमतों को अस्थिर बना रहा है।
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, चांदी का बढ़ता स्तर इंडस्ट्रियल डिमांड के लिए खतरा बन सकता है। कई कंपनियां फोटोवोल्टिक सेल और बैटरी निर्माण में चांदी के बजाय तांबे का विकल्प अपना रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि FY27 तक चांदी में 60% तक की गिरावट संभव है। पुराना इतिहास भी यही दर्शाता है कि बुल मार्केट के बाद चांदी में भारी करेक्शन आता है, जैसा कि 1980 और 2011 में देखा गया था।



