केंद्र सरकार ने ग्रामीण भारत के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। मनरेगा की जगह अब नया कानून ‘विकसित भारत – जी राम जी एक्ट, 2025’ लागू किया गया है, जिसका उद्देश्य गांवों में रोजगार व्यवस्था को अधिक मजबूत, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है। सरकार का कहना है कि यह कानून ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगा और गांवों को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
इस नए कानून के तहत मजदूरों को काम पूरा होने के एक सप्ताह के भीतर मजदूरी देना अनिवार्य होगा। यदि 15 दिन के भीतर भुगतान नहीं होता है, तो मजदूर को 0.05 प्रतिशत की दर से ब्याज के रूप में अतिरिक्त राशि दी जाएगी। यह प्रावधान भुगतान में होने वाली देरी पर सख्त जवाबदेही तय करता है, जिससे श्रमिकों को समय पर मेहनताना मिल सके।
अब ग्रामीण श्रमिकों को 100 नहीं बल्कि 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी दी गई है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि रोजगार से जुड़े फैसलों में ग्राम सभा की भूमिका को केंद्रीय बनाया गया है, ताकि गांव की वास्तविक जरूरतों के अनुसार काम तय हो सके। साथ ही बेरोजगारी भत्ते के प्रावधानों को भी पहले से अधिक प्रभावी किया गया है।
‘जी राम जी’ कानून के अंतर्गत जल संरक्षण, बुनियादी ढांचा, आजीविका संवर्धन और आपदा प्रबंधन जैसे कार्यों पर विशेष फोकस रहेगा। इससे रोजगार के साथ-साथ गांवों के समग्र विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कम से कम 33 प्रतिशत काम महिलाओं को देने का प्रावधान किया गया है।
खेती के पीक सीजन को ध्यान में रखते हुए राज्यों को यह अधिकार दिया गया है कि वे 60 दिनों तक कृषि कार्यों में श्रमिकों को लगाने की अनुमति दे सकें। वहीं, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि मनरेगा से जुड़े सभी कर्मियों का रोजगार सुरक्षित रहेगा और वही कर्मचारी नए कानून को भी लागू करेंगे।



