आज के डिजिटल दौर में पर्सनल लोन लेना जितना आसान हुआ है, उतना ही खतरनाक भी बनता जा रहा है। मोबाइल में एक ऐप डाउनलोड किया, पैन-आधार अपलोड किया और कुछ ही मिनटों में पैसा खाते में। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसकी कीमत आप अपनी प्राइवेसी से चुका रहे हैं?
दरअसल, कई इंस्टेंट पर्सनल लोन ऐप्स लोन देने के बहाने आपके मोबाइल का पूरा डेटा एक्सेस कर लेते हैं। इनमें आपके फोन कॉन्टैक्ट्स, लोकेशन, कॉल लॉग और यहां तक कि गैलरी तक शामिल होती है। चौंकाने वाली बात यह है कि क्रेडिट स्कोर या लोन अप्रूवल के लिए इन जानकारियों की कोई जरूरत ही नहीं होती।
विशेषज्ञों के मुताबिक, RBI से रजिस्टर्ड बैंक और NBFC सख्त नियमों के तहत काम करते हैं, लेकिन कई ऐप्स सिर्फ बिचौलिए होते हैं। इनका असली मकसद लोन देना नहीं, बल्कि यूजर्स का डेटा इकट्ठा करना और उसे अलग-अलग कंपनियों को बेचना होता है। यही वजह है कि एक बार लोन के लिए अप्लाई करने के बाद लोगों के पास अनजान नंबरों से कॉल और मैसेज आने लगते हैं।
सबसे गंभीर मामला तब सामने आता है, जब कोई व्यक्ति समय पर लोन नहीं चुका पाता। ऐसे में कुछ ऐप्स यूजर के फोन कॉन्टैक्ट्स में मौजूद दोस्तों और रिश्तेदारों को कॉल कर उन्हें मानसिक रूप से परेशान करते हैं। यह न सिर्फ अनैतिक है, बल्कि कानूनन अपराध भी है।
ध्यान देने वाली बात यह भी है कि लोन रिजेक्ट होने के बाद भी आपका डेटा ऐप्स के सर्वर पर स्टोर रहता है। प्राइवेसी पॉलिसी में “बिजनेस पर्पस” जैसे शब्दों के जरिए कंपनियां खुद को डेटा शेयर करने की छूट दे देती हैं।
अगर आपके साथ ऐसा हो रहा है, तो घबराएं नहीं। तुरंत सबूत इकट्ठा करें, ऐप की परमिशन बंद करें, उसे अनइंस्टॉल करें और कंपनी की शिकायत करें। इसके बाद RBI लोकपाल और साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराएं। याद रखिए, जल्दी में लिया गया लोन आपकी जिंदगी को मुश्किल बना सकता है। सावधान रहें, सुरक्षित रहें।



