क्या 2029 में वाकई मोदी की कुर्सी हिलने वाली है? क्या राहुल गांधी बनने वाले हैं देश के अगले प्रधानमंत्री? और इस पूरे खेल में “नितिन” नाम का ऐसा क्या कनेक्शन है, जिसने सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है! आज की ये खबर सिर्फ खबर नहीं, बल्कि राजनीति का हाई-वोल्टेज ट्विस्ट है।
भारतीय जनता पार्टी को आखिरकार लंबा इंतज़ार खत्म होने के बाद नया अध्यक्ष मिल गया है। नितिन नबीन—नाम छोटा, लेकिन सियासी असर बड़ा! पार्टी ने उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष बनाया और ठीक उसी के बाद उन्होंने बिहार की नीतीश सरकार में मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। साफ है, बीजेपी ने बड़ा दांव चला है… लेकिन हैरानी की बात ये कि इस दांव से कांग्रेस में जश्न का माहौल क्यों बन गया?
जी हां, कांग्रेस खुश है! और इस खुशी की वजह खुद कांग्रेस के दिग्गज नेता भूपेश बघेल हैं। छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र में बघेल ने ऐसा बयान दे दिया, जिसने सियासत में आग लगा दी। उन्होंने कहा— “जब-जब बीजेपी में अध्यक्ष का नाम नितिन रहा है, तब-तब केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनी है।” और फिर तंज कसते हुए बोले— “अब दूसरा नितिन आया है, तो इशारा साफ है… अगली सरकार हमारी!”
लेकिन सवाल ये है— क्या ये दावा सच है या सिर्फ सियासी भ्रम? आंकड़े कुछ और ही कहानी कहते हैं। नितिन गडकरी 2010 में बीजेपी अध्यक्ष बने थे, लेकिन उस दौरान कोई लोकसभा चुनाव हुआ ही नहीं। यानी बघेल का दावा तथ्यों की कसौटी पर फेल हो जाता है।
और सबसे बड़ा झटका कांग्रेस को तब लगा था, जब नितिन नबीन 2023 में छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के प्रभारी बने। नतीजा? कांग्रेस का किला ढह गया— 90 में से 54 सीटें बीजेपी के खाते में चली गईं।
तो सवाल अब भी वही है— क्या “नितिन फैक्टर” 2029 में इतिहास दोहराएगा, या ये सिर्फ सियासी बयानबाज़ी है? फैसला जनता करेगी… लेकिन इतना तय है, राजनीति का खेल अब और भी दिलचस्प हो चुका है!



