दोस्तों, आज भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी और चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। गुरुवार का दिन रुपये के लिए काला दिन साबित हुआ—क्योंकि डॉलर के मुकाबले रुपया 38 पैसे लुढ़ककर 90.32 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ! और तो और, आज मार्केट खुलते ही रुपया 90.43 से फिसलकर सीधे 90.56 तक पहुंच गया… ये गिरावट सिर्फ नंबर नहीं है—ये उस दबाव की निशानी है जो भारतीय अर्थव्यवस्था महसूस कर रही है!
उधर, अमेरिकी डॉलर अपनी ताकत दिखा रहा है! डॉलर इंडेक्स 98.37 पर ट्रेड कर रहा है—मतलब दुनियाभर की करेंसियों पर डॉलर का दबदबा फिर बढ़ रहा है। इसी बीच, ब्रेंट क्रूड ऑयल भी 0.67% उछलकर 61.69 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। यानी आयात महंगा… और रुपया कमजोर! लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती—घरेलू मार्केट में सेंसेक्स 400 पॉइंट उछला और निफ्टी भी 26,000 के ऊपर चला गया। फिर भी रुपया गिर क्यों रहा है?
यहां आता है पहला बड़ा कारण—India-US Trade Agreement की अनिश्चितता! दोस्तों, इंडिया और अमेरिका के बीच ट्रेड डील अपनी फाइनल स्टेज में जरूर है, लेकिन अभी तक कोई क्लियर रिज़ल्ट सामने नहीं आया। ये अनिश्चित माहौल इन्वेस्टर्स के मन में डर पैदा कर रहा है। मार्केट में ये सवाल घूम रहा है—”डील होगी भी या नहीं?” इसी डर की वजह से ट्रेडर्स और इन्वेस्टर्स सेफ साइड में जा रहे हैं, और इससे रुपये पर दबाव बढ़ रहा है।
अब बात करते हैं दूसरे सबसे बड़े कारण की—विदेशी निवेशकों की जबरदस्त बिकवाली! जी हां, सिर्फ एक ही दिन में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs ने 2,020 करोड़ रुपए के शेयर बेच डाले! दिसंबर महीने की बात करें तो अभी तक कुल 22,500 करोड़ रुपए मार्केट से निकाल चुके हैं, यानी करीब 2.5 बिलियन डॉलर की सेलिंग! जब इतनी बड़ी रकम बाहर जाती है, तो रुपये का दबाव में आना लाज़मी है। और इसी बिकवाली ने रुपये को घुटने पर ला दिया है।
तो दोस्तों, एक तरफ ट्रेड डील की अनिश्चितता, और दूसरी तरफ विदेशी निवेशकों का पलायन, यही दो बड़े कारण आज भारतीय रुपये की कमर तोड़ रहे हैं। सवाल अब ये है—क्या आने वाले दिनों में रुपया और टूटेगा… या करेगा दमदार वापसी? जुड़े रहिए… क्योंकि आने वाली आर्थिक हलचलें तय करेंगी रुपये का भविष्य!



