दोस्तों क्या आप भी छोटे-मोटे ट्रांजैक्शन के लिए हर रोज गूगल Pay, PhonePe या Paytm जैसे UPI ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं? अगर हां, तो आपके लिए एक बड़ी खबर है! 1 अगस्त 2025 से UPI के नियमों में बड़े बदलाव होने जा रहे हैं, जो आपके रोज़मर्रा के लेन-देन को प्रभावित कर सकते हैं। जी हां, अब आप एक दिन में 50 बार से ज्यादा अपना बैंक बैलेंस चेक नहीं कर पाएंगे, और ऑटो-पेमेंट का समय भी बदल जाएगा। तो आइए, इन नए नियमों को विस्तार से समझते हैं और जानते हैं कि ये आपके लिए क्या मायने रखते हैं।
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, यानी NPCI ये नए नियम लागू किए हैं। इसका मकसद है UPI को और तेज़, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना। आपको बता दे हर महीने भारत में UPI के ज़रिए 16 अरब से ज्यादा ट्रांजैक्शन होते हैं। लेकिन अप्रैल और मई 2025 में सिस्टम पर भारी दबाव के कारण कई बार पेमेंट फेल हुए और देरी की शिकायतें सामने आईं। NPCI के मुताबिक, इसका बड़ा कारण है यूज़र्स का बार-बार बैलेंस चेक करना और ट्रांजैक्शन स्टेटस रीफ्रेश करना।
तो, आइए पहले बात करते हैं सबसे बड़े बदलाव की— जो बैलेंस चेक की सीमा से जुड़ा है । 1 अगस्त से, आप किसी एक UPI ऐप पर दिन में अधिकतम 50 बार ही अपना बैंक बैलेंस चेक कर पाएंगे। अगर आप गूगल Pay और PhonePe दोनों इस्तेमाल करते हैं, तो हर ऐप पर आपको 50 बार की लिमिट मिलेगी। इसके अलावा, अपने मोबाइल नंबर से लिंक्ड बैंक अकाउंट्स की लिस्ट को देखने की सीमा भी तय की गई है— जो दिन में सिर्फ 25 बार है । और अगर आपका कोई ट्रांजैक्शन फेल हो जाता है, तो आप उसका स्टेटस सिर्फ 3 बार चेक कर सकते हैं, वो भी हर बार 90 सेकंड के अंतराल के साथ। NPCI का कहना है कि ये कदम सिस्टम पर अनावश्यक दबाव को कम करेंगे, जिससे ट्रांजैक्शन्स तेज़ और स्मूथ होंगे।
अब बात करते हैं ऑटो-पेमेंट की। अगर आप Netflix, बिजली-पानी के बिल, EMI या मोबाइल रिचार्ज जैसे पेमेंट्स के लिए UPI ऑटो-पे का इस्तेमाल करते हैं, तो अब ये पेमेंट्स पूरे दिन रेंडमली तरीके नहीं होंगे। NPCI ने इसके लिए खास समय-स्लॉट तय किए हैं—सुबह 10 बजे से पहले, दोपहर 1 से 5 बजे के बीच, और रात 9:30 बजे के बाद। इसका मतलब है कि आपके ऑटो-पेमेंट्स अब इन समयों पर ही प्रोसेस होंगे। इससे सिस्टम पर भीड़ कम होगी और पेमेंट्स की स्पीड बढ़ेगी। आम यूज़र्स के लिए, जैसे कि मोबाइल रिचार्ज या सब्सक्रिप्शन पेमेंट्स, इसमें कोई खास बदलाव महसूस नहीं होगा। लेकिन व्यापारियों और बिज़नेस को अपने कलेक्शन टाइम को इन स्लॉट्स के हिसाब से मैनेज करना होगा।
अब सवाल कि क्या ये नियम सभी पर लागू होंगे? जी हां, चाहे आप दिन में एक बार UPI का इस्तेमाल करें या 20 बार, ये लिमिट्स सभी यूज़र्स पर लागू होंगी। लेकिन अगर आप बार-बार बैलेंस चेक या स्टेटस रीफ्रेश नहीं करते, तो शायद आपको कोई परेशानी नहीं होगी। अच्छी बात ये है कि UPI के ट्रांजैक्शन लिमिट में कोई बदलाव नहीं हुआ है। आप सामान्य ट्रांजैक्शन्स के लिए प्रति लेन-देन 1 लाख रुपये और हेल्थकेयर या एजुकेशन जैसे खास सेक्टर्स के लिए 5 लाख रुपये तक भेज सकते हैं।
इसके साथ ही NPCI ने ये भी सुनिश्चित किया है कि बैंक और पेमेंट ऐप्स इन नियमों का सख्ती से पालन करें। अगर कोई बैंक या ऐप इन गाइडलाइंस को फॉलो नहीं करता, तो उन पर जुर्माना लगाया जा सकता है या उनका API एक्सेस भी ब्लॉक किया जा सकता है। इसके अलावा, सभी पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को 31 अगस्त 2025 तक सिस्टम ऑडिट करवाना होगा।
तो, इन बदलावों का आपके लिए क्या मतलब है? अगर आप अपनी आदतों में थोड़ा बदलाव लाएं—जैसे कि ज़रूरत पड़ने पर ही बैलेंस चेक करें, ट्रांजैक्शन स्टेटस बार-बार रीफ्रेश न करें, और ऑटो-पेमेंट्स के समय का ध्यान रखें—तो आपका UPI अनुभव और बेहतर होगा। NPCI का ये कदम भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम को और स्मूथ और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।
तो, अगली बार जब आप UPI से पेमेंट करें, इन नए नियमों को ज़हन में रखें और अपने डिजिटल अनुभव को और बेहतर बनाएं।